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मुझको दीवाना कह लो

तुम्हे प्यार नहीं तो क्या

मुझको दीवाना कह लो

उम्मीदे वफ़ा नहीं तो क्या

मुझको दीवाना कह लो |

धूं धूं जलते अंतर्मन में

प्राण अभी बाकी रह गये

अस्तित्व बिखरने को था

ठोकर खाकर सम्हल गये |

दे जाती हो मृगतृष्णा तो क्या

मुझको दीवाना कह लो

नित्य प्रतीक्षा व्यर्थ तो क्या

मुझको दीवाना कह लो |

संघर्ष जीवन में कम नहीं

छोटी छोटी खुशियां बटोर लो

सुख दुःख के साथी हैं मुश्किल

जो मिला उसी में प्रेम टटोल लो |

तेरा आना भ्रम तो क्या

मुझको दीवाना कह लो

तुम्हे प्यार नहीं तो क्या

मुझको दीवाना कह लो |

                                डॉ. रूपेश जैन 'राहत'