कुछ ख़्वाब बुन लेना जीना आसान हो जायेगा
कुछ ख़्वाब बुन लेना जीना आसान हो जायेगा
कुछ ख़्वाब बुन लेना जीना आसान हो जायेगा
दिल की सुनलेना मिज़ाज शादमान हो जायेगा
लर्ज़िश-ए-ख़याल में ज़र्द किस काम का है बशर
जानें तो हुनर तिरा मुल्क़ निगहबान हो जायेगा
हो गया ख़ामोश गिर के इंसां तौबा भी कीजिये
उठकर देखिये झुकने को आसमान हो जायेगा
ख़ुद से मिला कीजिये रोज़ाना आईने के रूबरू
बिख़रा जो चकाचौंध में फिर इंसान हो जायेगा
रस्म है ज़िंदगी करवटें बदलती रही इब्तिदा से
शिद्दत से जिया जो मालिक भी हैरान हो जायेगा
टूटना और फिर बिखर जाना आदत है शीशे की
हो मुस्तक़िल अंदाज़ ज़माना क़द्रदान हो जायेगा
इल्ज़ामात हैं बस इम्तिहान थोड़ा सब्र कीजिये
शाम-ए-वस्ल आने दो प्यार जवान हो जायेगा
मुद्दत लगती है दिलकश फ़साना बन जाने को
हिम्मत रख वक़्त पे इश्क़ मेहरबान हो जायेगा
मंज़िल-ए-इश्क़ में बाकीं हैं इम्तिहान और अभी
ब-नामें मुहब्बत 'राहत' बेख़ौफ़ क़ुर्बान हो जायेगा
- डॉ. रूपेश जैन 'राहत'