"शाला सिद्धि-हमारी शाला ऐसी हो
प्रदेश में सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में शिक्षा में गुणात्मक सुधार और शिक्षकों द्वारा नये-नये प्रयोग किये जाने के मकसद से 25 हजार शालाओं में 'शाला सिद्धि-हमारी शाला ऐसी हो'' कार्यक्रम स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से चलाया जा रहा है। इन शालाओं के श्रेष्ठ प्रस्तुतिकरण और विचारों को साझा करने के लिये राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा भोपाल के एप्को सभागार में 28 और 29 सितम्बर को दो-दिवसीय सेमीनार हुआ। सेमीनार में हर जिले से 4-4 चैम्पियन शालाओं ने अपने श्रेष्ठ कार्यों को प्रस्तुत किया।
सेमीनार के दूसरे दिन आज प्रदेश के 23 जिलों के प्रतिनिधियों ने प्रस्तुतियाँ दीं। सीहोर जिले के नसरुल्लागंज विकासखण्ड की चैम्पियन शाला बोरखेड़ाकला की माध्यमिक शाला के शिक्षक ने बताया कि स्मार्ट-क्लॉस के माध्यम से बच्चों को विज्ञान की कठिन से कठिन जानकारियों को आसानी से समझाया जा रहा है। इसके अलावा बच्चों को देश के महापुरुषों, तीज-त्यौहारों के बारे में जानकारी देने के लिये प्रोजेक्ट वर्क करवाया जा रहा है। इन सब गतिविधियों के कारण गाँव में संचालित दो प्रायवेट स्कूल बंद हो गये हैं और बच्चों का रुझान सरकारी स्कूल की तरफ बढ़ा है। जिले के सिरावली गाँव के शिक्षक ने बताया कि उनकी सरकारी माध्यमिक शाला ने अपना ध्येय वाक्य तैयार किया है- 'रोज स्कूल जायेंगे, कुछ नया सीखकर आयेंगे''। शिक्षकों ने शाला गतिविधियों में समुदाय की सहभागिता को प्रोत्साहित किया है। सरकारी स्कूल ने नवाचारी शैक्षिक गतिविधियों पर आधारित 'एम.एस. सिरावली'' नाम से यू-ट्यूब चैनल बना लिया है। इस चैनल पर उनके स्कूल की शैक्षिक वीडियो और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के प्रोफाइल उपलब्ध हैं।
सेमीनार में मण्डला जिले के ग्राम पौंडी में संचालित माध्यमिक शाला में पदस्थ शिक्षिका श्रीमती शैलेन्द्री ने नवाचार किये हैं। इन नवाचारों के कारण आज उनके स्कूल के छात्र अंग्रेजी भाषा में दक्ष हुए हैं और विद्यार्थी पढ़ाई में इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने अपनी शाला का ध्येय वाक्य 'सोच हमारी ऐसी हो, जो सपनों को आगे बढ़ाये'' रखा है। अनूपपुर जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर ग्राम मानपुर के प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती चन्द्रकला पंत ने गाँव की नदी के पत्थरों, रेत और वनस्पति से अनेक शैक्षणिक सामग्री का निर्माण किया है। वे इन सामग्रियों का उपयोग बच्चों को विभिन्न विषयों को पढ़ाने में कर रही हैं। छिन्दवाड़ा जिले के ग्राम चौरई में वर्ष 2016 से शाला सिद्धि कार्यक्रम शुरू हुआ। जिले के शिक्षकों ने अनेक शैक्षिक नवाचार प्रारंभ किये। इसका परिणाम यह हुआ कि क्षेत्र के बच्चों का रुझान सरकारी स्कूल की तरफ बढ़ा। ग्राम चौरई की सरकारी शाला में समाचार पटल बनाया गया है। इस पटल को न्यूज टुडे का नाम दिया गया है।
सेमीनार के दूसरे दिन शिक्षा के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ाने के संबंध में अनेक प्रस्तुतियाँ दी गईं। सेमीनार में राज्य शिक्षा केन्द्र की संचालक आईरीन सिंथिया जे.पी. ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों के भविष्य निर्माण में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके लिये शिक्षकों को अपने कौशल का विकास निरंतर करते रहना चाहिये। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तकनीकी समूह के शिक्षाविद् डॉ. आर.एन. लेंका ने भी विचार व्यक्त किये।