हरजाई चाँद को मत बुलाना
मुझे जो बुलाना छत पे तो उस हरजाई चाँद को मत बुलाना
बहुत बदमाश है वो सरफिरा उसे तुम अपने मुँह मत लगाना
बड़ी बुरी आदत है उस जालिम की मुझसे उलझते रहने की
कितनी भी करें वो मिन्नतें तुम अपना मुखड़ा मत दिखाना
क्या समझता है कि वो आसमाँ में रहता है तो तुमको जीत लेगा
लाके रख दे सितारे भी कदमों में तुम अपनी कीमत मत बताना
वो होके आएगा सवार बादलों पे तुम्हारे दीदारे-ए-हुश्न को
वो आजमा ले सब मनमर्जियाँ तुम झरोखा मत हटाना
वो कहेगा कि ये सबसे हसीन रात है इस सदी की जानम
खुली आँखों से सपने देखना,उसकी आगोश में रात मत बिताना
सलिल सरोज