Top Story

हम आपकी तारीफों के पुल बाँध तो देंगे

चाशनी ही चाशनी घुल जाएगी बातों में

अपनी सोच में जरा मोहब्बत तो लाइए


बेरुखी के सब सिलसिले खत्म हो जाएँगे

तआरुफ़ में मुसलसल तरावट तो लाइए


हुश्न आपका सबके सर आज भी चढ़ के बोलेगा

अदाओं में हुज़ूरेवाला कुछ नज़ाकत तो लाइए


पेंच पे पेंच,गिरहों पे गिरहें पड़ती चली जाएँगी

अपनी मरहबा ज़ुल्फ़ों में सजावट तो लाइए


हम आपकी तारीफों के पुल बाँध तो देंगे

हमारी दिलरुबा से इसकी इजाजत तो लाइए


ज़माने में कौन है जो आपकी तीरे नज़र से बचा है

घायल हम भी हो जाते हैं, पहले सामने-राहत तो लाइए


सलिल सरोज