हम आपकी तारीफों के पुल बाँध तो देंगे
चाशनी ही चाशनी घुल जाएगी बातों में
अपनी सोच में जरा मोहब्बत तो लाइए
बेरुखी के सब सिलसिले खत्म हो जाएँगे
तआरुफ़ में मुसलसल तरावट तो लाइए
हुश्न आपका सबके सर आज भी चढ़ के बोलेगा
अदाओं में हुज़ूरेवाला कुछ नज़ाकत तो लाइए
पेंच पे पेंच,गिरहों पे गिरहें पड़ती चली जाएँगी
अपनी मरहबा ज़ुल्फ़ों में सजावट तो लाइए
हम आपकी तारीफों के पुल बाँध तो देंगे
हमारी दिलरुबा से इसकी इजाजत तो लाइए
ज़माने में कौन है जो आपकी तीरे नज़र से बचा है
घायल हम भी हो जाते हैं, पहले सामने-राहत तो लाइए
सलिल सरोज