तुम्हारा काजल, बिंदी, चूड़ी, कंगन
तुम कहो तो बन जाऊँ मैं
तुम्हारा काजल,बिंदी,चूड़ी,कंगन
तुम कहो तो लिपट जाऊँ बनके मैं
तेरा आँचल,अँगिया,ओढ़नी,पैजन
तुम कहो तो ढँक लूँ तुझे बनके मैं
आसमाँ,बादल,हवा,बरसता सावन
तुम कहो तो छू लूँ तुम्हें जैसे हो कली,गुलाब,माहताब,खिलता यौवन
तुम कहो तो थम जाऊँ मैं जैसे कि
साँस,नब्ज़,फड़कन,दिल की धड़कन
तुम कहो तो बना लूँ मैं तुमको अपनी
खुशी,ग़म,मिलन,तड़पन और विरहन
- सलिल सरोज