बच्चों की लंबी उम्र की कामना की
Publish Date: | Mon, 10 Aug 2020 04:09 AM (IST)
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वसंत कॉलोनी में हुआ हरछट का पूजन
छिंदवाड़ा। रविवार को लॉकडाउन के दौरान हरछट का त्योहार परंपरागत तरीके से मनाया गया। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण महिलाओं ने घर पर रहकर ही ये त्योहार मनाया। वसंत नगर कॉलोनी में इस त्योहार को धूमधाम से मनाया गया। रुचि अवस्थी और स्वेता मिश्रा ने बताया कि बच्चों की लंबी आयु की कामना के लिए ये पूजन किया जाता है। इस दौरान दिन भर महिलाएं व्रत रखती हैं, सिर्फ उस फल का सेवन करती हैं, जो हल चलाए बिना लगाया गया हो। दोपहर को विधि विधान से महिलाओं ने व्रत और पूजन किया।
जिले में अभी तक 611.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज
छिंदवाड़ा। जिले में अभी तक 611.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि गत वर्ष इस अवधि तक 521.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई थी। जिले में रविवार सुबह 8 बजे तक 15.6 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। अधीक्षक भू-अभिलेख ने बताया कि रविवार को सुबह तहसील छिंदवाड़ा में 12.4, मोहखेड़ में 22.4, तामिया में 19, अमरवाड़ा में 20, चौरई में 13.3, हर्रई में 12, सौंसर में 6, बिछुआ में 6.4, परासिया में 37.3, जुन्नाारदेव में 40.6, चांद में 11.2 और उमरेठ में 1.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि जिले में एक जून से अभी तक तहसील छिन्दवाडा में 499.3, मोहखेड में 650, तामिया में 546, अमरवाड़ा में 719.8, चौरई में 804.8, हर्रई में 368.4, सौंसर में 637.5, पांढुर्णा में 634.6, बिछुआ में 582, परासिया में 642.8, जुन्नाारदेव में 721.2, चांद में 555.2 और उमरेठ में 528.8 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है।
40 पौधे रोपे गए
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पंच-ज अभियान के तहत किया गया पौधारोपण
छिंदवाड़ा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बी. एस. भदौरिया के मार्गदर्शन में रविवार को जजेस कॉलोनी में पंच-ज अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण के घटक जल, जंगल, जमीन, जन एवं जानवर के संरक्षण, सुरक्षा और पुनर्संवर्धन के लिये पौधारोपण कार्यक्रम संपन्ना हुआ। जिसमें लगभग 40 पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष भदौरिया के साथ ही प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय चंद्रदेव शर्मा, विशेष न्यायाधीश राजीव कुमार आयाची, अपर जिला न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अरविंद कुमार गोयल, प्रथम अपर जिला न्यायाधीश डी.एस. परमार, चतुर्थ अपर जिला न्यायाधीश एस.के. वर्मा, पंचम अपर जिला न्यायाधीश विनोद कुमार शर्मा, षष्टम अपर जिला न्यायाधीश संध्या मनोज श्रीवास्तव, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती अभिलाषा एन.मवार, जिला रजिस्ट्रार/व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-1 प्रदीप सोनी और अन्य सभी न्यायाधीशगण उपस्थित थे। श्री भदौरिया ने लगाए गए पौधों की उचित देखभाल और उनका संवर्धन विशेष रूप से कराए जाने के निर्देश दिए।
भारतीय सनातनी शिक्षा जीवन के सरोकारों की शिक्षा हैःडॉ. सिंह
छिंदवाड़ा। चांद कॉलेज के अंग्रेजी के प्राध्यापक डॉ. अमर सिंह ने महाराष्ट्र के शिवाजी महाविद्यालय उदगिर लातूर द्वारा आयोजित नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत ‘भारतीय सनातनी शिक्षा के मनोविज्ञान’ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सनातनी शिक्षा अन्त?करण से संचालित तत्व ज्ञान की क्रिया होती है जिसमें संकल्पनाओं के सिद्धान्तों को मानव के दैनिक जीवन के सरोकारों से जनित समस्याओं के समाधान से है। मन के द्वंद्व बुद्धि को अस्थिर बनाते हैं जिसका समाधान एकात्म चित्तबद्धता के नियंत्रण से ही संभव है। बुद्धि जब गृहनशील बनती है तो अपने धारक की पात्रता बढ़ाती है। मन को अन्त?करण के परिमार्जन से ज्ञान अधिगम हेतु अनुशासित कर जीवन वृत्तियों से जूझना पड़ता है। बुद्धि के संश्लेषण, विश्लेषण व विवेचन से ज्ञान पिपासु व्यक्ति में धारण करने की क्षमताओं का विकास होता है असंयमित मन, बुद्धि व चित्त संतुलित ज्ञानार्जन न करके अपेक्षित परिणाम नहीं ला पाते हैं।जब छात्र को उपकरणों की भरमार से अतिसुविधाभोगी बना दिया जाता है तो वह मेधा प्राप्ति की गहराई का सुअवसर खो देता है। अत? शैक्षिक उत्कृष्टता हेतु इंद्रियनिग्रह के माध्यम से अन्त?करण की शुचिता प्राप्त करना परमावश्यक है। चित्त हमारी संस्कार भूमि है जहां ईश्वरीय तत्वों का वास होता है। शिक्षा दैवीय गुणों का प्रकटन इसी सुवासित चित्त की उर्वर जमीन पर करती है। आचार्य व शिष्य की शिक्षा ग्रहण करने की निष्ठा जब श्रद्धा व विनम्रता का आभूषण पहनती है तो परिणाम चमत्कारी निकलते हैं। आज हम सभी भाग्यज्ञवान हैं कि हम परिवर्तन के कालखंड में जी रहे हैं। हमारी सनातनी संस्कृति आज भी सभी विपत्तियों के समाधान देने के लिए प्रासंगिक है।
आत्म शांति का अमोध उपाय है क्रमबद्वपर्याय – पं. मनीष शास्त्री
मुमुक्षु मंडल एवं सर्वोदय अहिंसा की चार दिवसीय क्रमबद्धपर्याय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
छिंदवाड़ा। ‘क्रमबद्धपर्याय’ इस शब्द में ‘क्रम’ का अर्थ है -‘एक के बाद एक’, ‘बद्ध’ शब्द का अर्थ है, ‘अपने समय में सुनिश्चित’ और ‘पर्याय’ शब्द का अर्थ है ‘वस्तु का परिवर्तन’। इस प्रकार ‘क्रमबद्धपर्याय’ का अर्थ यह हुआ कि दुनिया की प्रत्येक वस्तु में जो भी परिवर्तन होता है, वह एक सुनिश्चित एवं सुव्यवस्थित क्रम में होता है, इसे कोई नहीं बदल सकता। इस सुनिश्चित व्यवस्था का नाम ही ‘क्रमबद्धपर्याय’ है। उक्त उदगार व्यक्त किए जैन दर्शन के युवा विद्वान पंडित डॉ. मनीष शास्त्री ने दिगंबर जैन मुमुक्षु मंडल एवं सर्वोदय अहिंसा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में चल रही चार दिवसीय ऑनलाइनविद्धवत संगोष्ठी में, उन्होंने कहा कि प्रश्न यह है कि इस सिद्धांत का आधार क्या है? इसका आधार तो स्वयं वह वस्तु है,किन्तु इसे समझने के लिए हमें सर्वज्ञता का सहारा लेना चाहिए। यद्यपि जैनदर्शन के इस सिद्धान्त को इस युग में आध्यात्मिक सत्पुरुष गुरुदेव कानजी स्वामी ने प्रचारित किया, लेकिन यह सिद्धांत पूरी दुनिया में प्राय? सभी धर्म-दर्शनों में किसी-न-किसी रूप में स्वीकृत है। दुनिया के सभी लोग प्राय? किसी-न-किसी ईश्वर में विश्वास रखते हैं। सभी लोग अपने भगवान को पूर्णज्ञानी ही मानते हैं। अर्थात सभी लोग अपने भगवान को सर्वज्ञ मानते हैं।
आज के कार्यक्रम –
संगोष्ठी के मीडिया प्रभारी दीपकराज जैन ने बताया कि संगोष्ठी के तीसरे दिन का शुभारंभ सोमवार को सुबह 7 बजे जिनेंद्र पूजन से होगा। जिसके बाद 8.15 से गुरूदेव का प्रवचन,8.45 से सार संक्षेप, 9 बजे से डॉ. हुकमचंद भारिल्ल के प्रवचन एवं 10 बजे से पं. शांतिकुमार पाटिल के प्रवचन होंगे। दोपहर 2 बजे से क्रमनियमित शतक पाठ, 2.15 से पांचवा सत्र जिसका संचालन पं.विनय शास्त्री करेंगे।
Posted By: Nai Dunia News Network
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