185 की रफ्तार से आ रहा ताउते, आखिर अरब सागर से अचानक क्यों उठने लगे इतने तूफान?
Tauktae Kya Hai : ताउते इस वर्ष का पहला तूफान है जो अरब सागर में उठा है। आप भले यह सुनकर हैरान नहीं हुए हों लेकिन आपको पता होना चाहिए कि ऐतिहासिक रूप से अरब सागर तूफानों का केंद्र नहीं रहा है। बल्कि बंगाल की खाड़ी में अक्सर चक्रवाती तूफान उठते रहे हैं।
What is Tauktae : ताउते इस वर्ष का पहला तूफान है जो अरब सागर में उठा है। आप भले यह सुनकर हैरान नहीं हुए हों लेकिन आपको पता होना चाहिए कि ऐतिहासिक रूप से अरब सागर तूफानों का केंद्र नहीं रहा है। बल्कि बंगाल की खाड़ी में अक्सर चक्रवाती तूफान उठते रहे हैं। लेकिन, 2017-18 के बाद माजरा बदल गया है। आखिर, क्यों आइए जानते हैं...
लगातार चार सालों से तूफानों का केंद्र बना है अरब सागर

आंकड़े बताते हैं कि 1891 से 2017 के बीच उत्तरी प्रशांत महासागर में सालाना पांच चक्रवाती तूफान उठा करते थे, उनमें चार बंगाल की खाड़ी में और सिर्फ एक अरब सागर में उठते थे। लेकिन, बीते चार सालों से अरब सागर से लगातार चक्रवाती तूफान उठ रहे हैं, वो भी अप्रैल-जून की मॉनसून पूर्व के महीनों में। ताउते से पहले 2020 में निसर्ग (Nisarga) महाराष्ट्र के तट से टकराया था। उससे पहले 2019 में वायु (Vayu) गुजरात जबकि 2018 में मेकानु (Mekanu) ओमान के तट से टकराया था। इन सभी चक्रवाती तूफानों का केंद्र अरब सागर ही था।
2017-18 के बाद बदल गया माजरा

2017-18 के बाद माजरा बदल गया और तब से अरब सागर में तीन तूफान उठे तो बंगाल की खाड़ी में चार। 2019 में अरब सागर ने बंगाल की खाड़ी को पीछे छोड़ दिया। उस वर्ष अरब सागर में पांच चक्रवाती तूफान उठे जबकि बंगाल की खाड़ी में तीन। हालांकि, बीते वर्ष 2020 में बंगाल की खाड़ी तीन चक्रवाती तूफानों का केंद्र बना जबकि अरब सागर में दो तूफान उठे।
आखिर अरब सागर से क्यों उठने लगे इतने तूफान?

अरब सागर का चक्रवाती तूफानों का केंद्र बनते जाने के पीछे बीते 40 वर्षों में उसके तटीय इलाकों के तापमान (Sea Surface Temperatures या SST) में वृद्धि होना है। इन वर्षों में अरब सागर का तटीय तापमान 1.2 से 1.4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है। चूंकि पानी गर्म होने पर पैदा हुई ऊर्जा से ही चक्रवात उठता, इस कारण बंगाल की खाड़ी में अक्सर तूफान उठते हैं क्योंकि वहां का तटीय तापमान 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर है।
और इस तरह अरब सागर बनने लगा तूफानों का केंद्र

अरब सागर का तटीय तापमान अक्सर बंगाल की खाड़ी के मुकाबले 1 से 2 डिग्री कम रहा करता था। चूंकि अब वहां का तापमान भी बढ़ रहा है, इसलिए तूफानों का उठना आम होता जा रहा है। यही कारण है कि केरल जैसे तटीय राज्यों को भारी वर्षा और चक्रवाती तूफानों का सामना करना पड़ रहा है। गोवा की राजधानी पणजी के आसपास तापमान 30 से 31 डिग्री सेल्सियस है जहां ताउते सबसे पहले टकराया है।
खतरे क्या हैं?

इसमें कोई संदेह नहीं कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण चक्रवाती तूफानों की संख्या तो बढ़ ही रही है, इससे तूफान तुरंत बहुत तेज गति भी पकड़ ले रहे हैं जिसे रैपिड इंटेंसिफिकेशन (Rapdi Intensification) कहा जाता है। जब हवा की गति 24 घंटे के अंदर 55 किमी प्रति घंटा या इससे भी ज्यादा हो जाए। जहां तक बात ताउते की है तो शनिवार को इसकी गति 80 से 90 किमी प्रति घंटे हो गई थी। रविवार को यह वृद्धि 145 से 155 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गई। आज इसकी गति 185 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
गुजरात की तरफ बढ़ रहा है ताउते

बहरहाल, केरल, कर्नाटक और गोवा के तटीय इलाकों में रविवार को तबाही मचाने के बाद चक्रवात ताउते महाराष्ट्र के तट पर पहुंच गया। गोवा के बाद, चक्रवात ने सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी जिलों को निशाना बनाया क्योंकि यह गुजरात के दक्षिण तट की ओर चक्कर लगाते हुए रायगढ़, मुंबई, ठाणे और पालघर जिलों की ओर बढ़ा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मंगलवार तक इसके लैंडफॉल बनाने का अनुमान है।
अरब सागर से उठा इस वर्ष का पहला तूफान

चक्रवात के चलते तटीय इलाकों में तेज हवाओं के साथ ही भारी बारिश हुई और समुद्र में ऊंची लहरें उठीं। आईएमडी ने बताया कि बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान ताउते अगले कुछ घंटों में और तीव्र हो सकता है और इसके सोमवार शाम तक गुजरात के तट पर पहुंचने की संभावना है। आईएमडी ने एक बुलेटिन में बताया कि यह मंगलवार तड़के तक पोरबंदर और भावनगर जिले में महुवा के बीच राज्य के तट को पार सकता है। 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं का आज 185 किमी प्रति घंटे तक की स्पीड पकड़ने का अनुमान है। ताउते इस वर्ष का पहला तूफान है जो अरब सागर में उठा है।
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