Ajit Singh Death: वीपी सिंह, नरसिम्हा राव, अटल, मनमोहन...सियासी हवा भांपने में माहिर थे अजित

नई दिल्ली राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के मुखिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह गुरुवार को कोरोना से जंग हार गए। वह 82 साल के थे। सात बार लोकसभा सदस्य रहे अजित की जाट बहुल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जबर्दस्त पकड़ रही है। आलोचक उन्हें मौके का साथी या यूं कहें अच्छे समय का दोस्त बताते रहे हैं। इसका कारण था उनका जीतने वाले गठबंधन के साथ हो लेना। कांग्रेस, भाजपा हो या फिर सपा उन्होंने मौका पड़ने पर सभी से हाथ मिलाया। वीपी सिंह सरकार में अजित केंद्रीय उद्योग मंत्री रहे। पीवी नरसिम्हा राव सरकार में उन्होंने बतौर खाद्य मंत्री सेवाएं दीं। लेकिन, 1996 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद अजित ने आरएलडी बनाई और 2001 में कृषि मंत्री के तौर पर अटल बिहारी बाजपेयी सरकार से जुड़ गए। वह 2003 तक राजग सरकार का हिस्सा रहे। बाद में अजित ने पलटी मारी और 2011 में संप्रग सरकार से हाथ मिलाया। मनमोहन सिंह सरकार में वह विमानन मंत्री रहे। अजित के पूरे राजनीतिक सफर में ऐसा कई बार हुआ जब सरकार और गठबंधन बनाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। 1989 में बागपत से वह पहली बार लाेकसभा सदस्य चुने गए। अमेरिका में की नौकरी मेरठ में 12 फरवरी 1939 में जन्मे अजित पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह के बेटे थे। उनकी मां का नाम था गायत्री देवी। उनके एक बेटा जयंत चौधरी और दो बेटियां हैं। अजित आईआईटी-खड़गपुर और शिकागो स्थित इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पढ़े हैं। पिता की विरासत संभालने से पहले उन्होंने अमेरिका में 15 साल कंप्यूटर इंडस्ट्री में काम किया। वह 1986 में पहली बार राज्यसभा सदस्य चुने गए।
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