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डब्ल्यूसीएल के अस्पतालों में सुविधा बढ़ाने की मांग


छिंदवाड़ा। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर होने का जिला प्रशासन भले ही लाख दावा करे, लेकिन हकीकत ये है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा चुकी हैं। जिला अस्पताल में भर्ती मरीज ने ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ से गड़बड़ी को लेकर शिकायत की है, जिस पर श्री नाथ ने कलेक्टर से जांच कर रिपोर्ट मांगी है। वहीं दूसरी ओर एक निजी अस्पताल में भी मरीज गलत इलाज को लेकर धरने पर बैठ गया। इसके अलावा डब्ल्यूसीएल के चेयरमैन के नाम पत्र लिखकर कांग्रेस विधायकों ने डब्ल्यूसीएल के अस्पतालों में स्वास्थय सुविधाएं बढ़ाने की मांग की है।

कांग्रेस विधायकों ने की मांगः कांग्रेस विधायक सुनील उइके और सोहन वाल्मीकि ने पत्र लिखकर कहा है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए डब्ल्यूसीएल के अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए। जिला मुख्यालय स्थित परमानंद अस्पताल को कोविड अस्पताल में परिवर्तित किया जाना चाहिए, साथ ही यहां कोरोना का इलाज होना चाहिए। वर्तमान में बैड नहीं मिलने के कारण मरीज परेशान हो रहे हैं। वहीं बड़कुही के अस्पताल जो कोविड केयर सेंटर के रूप में संचालित है, वहां बिस्तरों की संख्या काफी कम है,अस्पताल में तीन आइसीयू वार्ड हैं, जिसको अपडेट कर आरंभ करने की आवश्यकता है। इसके अलावा ऑक्सीजन प्लांट लगाने की आवश्यकता है। वहीं जुन्नाारदेव में संचालित वेलफेयर हॉस्पिटल वर्तमान में कोविड केयर सेंटर के रूप में संचालित है। अस्पताल में व्यवस्था नहीं होने के कारण किसी तरह इलाज हो रहा है, यहां एक बाईपेप मशीन, वेंटिलेटर आदि उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि गंभीर मरीजों का इलाज हो सके।आइसीयू यूनिट भी शुरू करने की आवश्यकता है। यहां 50 बिस्तरों का अस्पताल है, जिसे बढ़ाकर 100 बिस्तरों का करने की आवश्यकता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा पत्रः पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कलेक्टर सौरभ सुमन को पत्र लिखकर जिला अस्पताल की अव्यवस्था को लेकर जांच की मांग की है और एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट देने को कहा है। परासिया निवासी अश्विी जायसवाल ने बताया कि उनके पिता अमुल जायसवाल 17 अप्रैल को जिला अस्पताल में कोरोना के चलते भर्ती हुए थे, 22 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। इस दौरान अव्यवस्था का आलम ये रहा कि दवाएं, ऑक्सीजन और जांच अस्पताल में नहीं की गई।यही नहीं भोजन के लिए भी वो परेशान रहे। बार, बार कहने के बाद भोजन भी दोपहर 2 बजे के बाद मिला। यही नहीं अस्पताल में सीटी स्केन के लिए 2500 रुपये की रिश्वत ली गई। जिसके बाद भर्ती होने पर अस्पताल के स्टॉफ ने भी 500 रुपये की रिश्वत मांगी।आरटीपीसीआर की रिपोर्ट के लिए भी दो हजार रुपये मांगे गए।