ब्लॉगः कोविड के टीके से इतना क्यों डर रहे आदिवासी
झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 100 किमी दूर मरांगहातु गांव में पिछले दिनों जब स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने टीकाकरण के लिए कैंप लगाया, तो पहले तो कोई उनके पास आने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद टीम ने गांव वालों को समझाने की कोशिश की। बताया कि टीकाकरण जरूरी है तो गांव वाले उन्हें मारपीट की धमकी देने लगे।
जिस मरांगहातु गांव की यह घटना है, वह कुचाई प्रखंड में पड़ता है। मैंने इस मामले की सचाई जानने के लिए यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ. शिवचरण हांसदा से बात की। उन्होंने बताया कि शुरुआत में टीका लगाने के बाद कुछ लोगों को बुखार आया, कुछ की तबीयत बिगड़ी, जो कि सामान्य बात है। लेकिन इस बात को लेकर टीकाकरण के खिलाफ दुष्प्रचार शुरू हो गया। खासकर वट्सऐप ने इसे और हवा दे दी। इसके बाद से जब भी उनकी टीम गांव में टीकाकरण कैंप लगाने जाती है तो लोग मारपीट की धमकी देकर उसे भगा देते हैं। डॉ. हांसदा ने यह भी बताया कि गांवों में कोविड के मरीज हैं, फिर भी इलाज के लिए कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं आता। हां, जब बिल्कुल जान पर बन गई तो कुछ लोग जरूर आए। मरांगहातु गांव के रहने वाले और वृहद झारखंड जनाधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष बिरसा सोय ने भी बताया कि गांव में टीके को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है।
सरायकेला-खरसांवा जिले के 9 प्रखंडों में से एक कुचाई प्रखंड है, जिसमें 10 पंचायतें हैं। जनसंख्या है 64,330 और परिवार 13,405। यहां साक्षरता दर पचास फीसदी से भी कम है। मरांगहातु के बिरसा सोय बताते हैं कि क्षेत्र में सरकारी स्तर पर कोविड या टीकाकरण को लेकर कोई जागरुकता अभियान नहीं चलाया गया। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मी सीधे गांव जाकर टीका लगाने की बात करते हैं तो आदिवासी घबरा जाते हैं। इसी वजह से स्वास्थकर्मियों और गांव वालों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं।....