एडिटः यह वॉट्सऐप का मार्केट में अपने दबदबे का बेजा इस्तेमाल नहीं तो और क्या है?

आखिर केंद्र सरकार ने अपना रुख सख्त करते हुए सोशल मीडिया मैसेजिंग प्लैटफॉर्म वॉट्सएप से साफ-साफ कह दिया कि उसे अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी वापस लेनी होगी। इलेक्ट्रॉनिक एंड इनफॉर्मेशन टेक्नॉलजी मंत्रालय की ओर से बुधवार को वॉट्सऐप को भेजे नोटिस में कहा गया है कि यह पॉलिसी देश के आईटी कानूनों के खिलाफ है और इसे स्थगित करने भर से यह नहीं साबित होता कि कंपनी इन कानूनों का सम्मान करती है। काफी समय से को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस चल रही है। यूजर्स का एक बड़ा हिस्सा इस पर खुलकर एतराज जता रहा है। केंद्र सरकार ने पहले भी वॉट्सऐप को पत्र भेजकर उसकी नई प्राइवेसी पॉलिसी पर सवाल उठाया था, लेकिन सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ने उस पर खास ध्यान नहीं देते हुए सिर्फ इतना किया कि यूजर्स के लिए इस प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकारने की समय सीमा 8 फरवरी से बढ़ाकर 15 मई कर दी। जाहिर है, इससे जुड़े सारे सवाल जस के तस रहे और 15 मई की समयसीमा गुजरने के बाद फिर सिर उठाने लगे। इस बीच यह मामला हाईकोर्ट भी पहुंच गया। वहां दायर याचिका में अदालत से गुजारिश की गई कि वह केंद्र सरकार को इस मामले में सख्ती बरतने को कहे। कोर्ट में वॉट्सऐप ने कहा कि 15 मई की समयसीमा के बाद भी तत्काल किसी यूजर का अकाउंट डिलीट नहीं किया जाएगा, लेकिन कंपनी यूजर्स को नई प्राइवेसी पॉलिसी स्वीकारने के लिए मनाना जारी रखेगी। जाहिर है, वॉट्सऐप अपने रुख पर अड़ी हुई है। तत्काल यूजर एकाउंट डिलीट नहीं करने का भला क्या मतलब बनता है? सवाल तो उसकी नई पॉलिसी के औचित्य पर है। आम यूजर्स ने जब उसकी सेवा लेनी शुरू की, तब उसने ऐसी शर्तें नहीं लगाई थीं। अब वह अचानक अपनी शर्तें बदल दे, यूजर्स को कोई विकल्प न देते हुए सीधा-सीधा कहे कि आपको यह सेवा लेनी हो तो लें वरना न लें, यह मार्केट में अपने दबदबे का बेजा इस्तेमाल नहीं तो और क्या है? सबसे बड़ी बात तो यह कि यही कंपनी यूरोपीय देशों के अपने यूजर्स के साथ जो संवेदनशीलता दिखा रही है, उनकी आपत्तियों के प्रति जैसा सम्मानजनक रुख प्रदर्शित कर रही है, उतना भी भारतीय यूजर्स के लिए नहीं कर रही। आखिर इस तरह के दोहरे मानदंड को कैसे उचित ठहराया जा सकता है? वॉट्सऐप या उस जैसी किसी भी कंपनी को यह मानने की छूट नहीं दी जा सकती कि भारत के नागरिकों की निजता का अधिकार दुनिया के किसी भी दूसरे देश के नागरिकों की तुलना में कम महत्वपूर्ण है या यह कि उसे यह अख्तियार है वह चाहे तो यहां के कानूनों को महत्व दे और चाहे तो न दे।
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