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Explainer: कोरोना वैक्सीन के पेटेंट पर क्यों अड़े हैं जर्मनी, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, ब्राजील और जापान, इन्हें क्‍या है दिक्कत?

पूरी दुनिया जब कोरोना से जंग लड़ रही है, उस समय भी कुछ देश अपना हित देखने में लगे हैं। कोरोना वैक्‍सीन के पेटेंट पर उनका अड़ियल रवैया बना हुआ है। इनमें खासतौर से जर्मनी, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, ब्राजील और जापान के नाम प्रमुख हैं। वहीं, जानकार मानते हैं कि पेटेंट में छूट मिलने से एंटी कोरोना वायरस तेज होगा। अमेरिकी प्रशासन भी कोरोना वैक्सीन पर पेटेंट सुरक्षा को अस्थायी रूप से हटाए जाने के प्रस्ताव का समर्थन कर चुका है। भारत और दक्षिण अफ्रीका की ओर से विश्व व्यापार संगठन (WTO) में इस आशय का प्रस्ताव रखा गया था। कोरोना वैक्सीन पर पेटेंट हटाए जाने के प्रस्ताव का जर्मनी, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, ब्राजील और जापान ने विरोध किया है। जर्मनी ने कहा है इंटेलेक्‍चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपदा) की सुरक्षा इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए अहम है। इसके साथ किसी भी हाल में समझौता नहीं होना चाहिए। पक्ष और विपक्ष की क्‍या हैं दलील? भारत सहित जो देश कोविड वैक्‍सीन पर पेटेंट को हटाए जाने के प्रस्‍ताव के पक्ष में हैं, उनका कहना है कि इससे गरीब देशों में वैक्‍सीन की उपलब्‍धता बढ़ेगी। वहीं, दवा कंपनियों सहित इस प्रस्‍ताव का विरोध करने वालों की दलील है कि इससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ेगा। क्‍या है विरोध करने वाले देशों का कहना? प्रस्‍ताव का विरोध करने वाले देशों का कहना है कि वैक्‍सीन के उत्‍पादन का पेटेंट से कोई सीधा संबंध नहीं है। अलबत्‍ता इसके पीछे उत्‍पादन क्षमता का सीमित होना और हाई क्‍वालिटी स्‍टैंडर्ड मुख्‍य वजहें हैं। क्‍या है छुपा एजेंडा? वैक्‍सीन पर पेटेंट को हटाने के प्रस्‍ताव का जर्मनी सबसे मुखरता से विरोध कर रहा है। यह नहीं भूलना चाहिए कि जर्मनी यूरोपीय यूनियन (EU) में सबसे शक्तिशाली देश है। बायोएनटेक सहित फार्मास्‍यूटिकल क्षेत्र की कई दिग्‍गज कंपनियां यहीं की हैं। ये दुनियाभर में इस्‍तेमाल हो रही कोरोना वैक्‍सीन विकसित कर रही हैं। पेटेंट हटाने का मतलब यह होगा कि इन कंपनियों को आर्थिक रूप से नुकसान होगा। फार्मास्‍यूटिकल कंपनियों को गरीब देशों के साथ वैक्‍सीन बनाने के तौर-तरीकों को साझा करना पड़ सकता है। वैसे, EU के कई अन्‍य देश जैसे फ्रांस और इटली ने पेटेंट को अस्‍थायी रूप से हटाने के प्रस्‍ताव का समर्थन किया है।


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