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महू की दो बहनों वाले केस में ISI का 'जासूस दूल्हा' वाला एंगल? जांच एजेंसियों का बढ़ता जा रहा है शक

इंदौर पांच दिन से इंदौर से सटे महू छावनी एरिया में दो बहनों से सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं। दो बहनों को घर में नजरबंद रखा गया है। बताया जा रहा है कि इनके पाकिस्तानी नागरिकों से संबंध हैं। पाकिस्तानी नागरिकों के साथ बातचीत और मैसेज के बार में सुरक्षा एजेंसियां इनसे जानकारी ले रही है। साथ ही उनकी तरफ से जो जानकारी दी जा रही है, उससे सुरक्षा एजेंसियां संतुष्ट नहीं है। साथ ही जांच एजेंसियां अब इस पर भी जांच कर रही है कि क्या दोनों बहनें आईएसआई के 'जासूस दूल्हे' की रणनीति के शिकार हुए थे। भारतीय एजेंसियों को शक है कि सुरक्षा प्रतिष्ठान के आसपवास रहने वाली भारती महिलाओं को लुभाने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की यह कोई नई रणनीति तो नहीं है। उसी रणनीति में महू के भाई-बहन फंस गए हो। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में दोनों बहनों ने यह जानकारी दी है कि ये पाकिस्तानी व्यक्तियों से शादी के लिए बात कर रही थीं। अभी तक हनीट्रैप के जरिए पाकिस्तानी एजेंसियां भारतीय जवानों को टारगेट करती थीं। महू की दोनों बहनों की उम्र 27 और 32 साल है। सूत्रों के अनुसार इन महिलाओं ने दावा किया है कि पाकिस्तानियों के साथ इनका संवाद शादी के इर्द-गिर्द था, लेकिन जांच एजेंसियां इससे सहमत नहीं हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मन में सवाल है कि दोनों बहनें सीमा पार क्यों दूल्हे की तलाश कर रही थीं, इसका जवाब उन्हें नहीं मिल पा रहा है। इससे शंका और बढ़ता जा रहा है। शादी के लिए कर रहे थे बात वहीं, अभी तक के कॉल रेकॉर्ड और मैसेज से पाकिस्तानियों के साथ बातचीत के बारे में पता चला है। वहीं, पाकिस्तानियों से बात करना कोई अपराध नहीं है, लेकिन आप कभी नहीं जानते कि दूसरी तरफ वाला व्यक्ति कौन है और उसके इरादे क्या हैं। जांच दल में शामिल एक अधिकारी ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि पाकिस्तानी युवकों में से एक ने कहा था कि मैं महू आना चाहता हूं और महिलाएं इस्लामाबाद जाने के लिए तैयार थीं। कई दौर की पूछताछ के दौरान बहनों ने कहा है कि उनका एकमात्र उदेश्य शादी था। फॉरेंसिक डाटा का इंतजार वहीं, केंद्रीय खुफिया एजेंसी और आर्मी इंटेलिजेंस को तीन सेल फोन के फॉरेसिंक डाटा का इंतजार है। एक महिला ने मिलिट्री साइंस में मास्टर डिग्री हासिल किया है और एनसीसी बालिका बटालियन इंदौर से 2016-17 में सी सर्टिफिकेट हासिल किया है। इनके पिता पूर्व आर्मी मैन रहे हैं। उनका निधन हो गया है। महिलाएं पाकिस्तानियों के साथ वीओआईपी कॉल के जरिए भी बात करती थीं। इसके साथ ही अपने फोन में कई सिम कार्ड का इस्तेमाल किया है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि इनके खातों में विदेश से कोई पैसे तो नहीं भेजे गए। वहीं, इस पूरे मसले पर इंदौर पुलिस के अधिकारियों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि दोनों महिलाओं पर लंबे समय तक निगरानी रखनी चाहिए थी कि क्या यह वास्तविक में एक लव स्टोरी है। वहीं, एक खेमे का कहना है कि दुश्मन की खुफिया जानकारी के जाल को विफल करने के लिए तुरंत कार्रवाई आवश्यक था। सूत्रों ने बताया कि दोनों बहनें आईएसआई के रडार पर इसलिए आईं क्योंकि सोशल मीडिया अकाउंट पर महू अपना लोकेशन लिख रखा था। एक अधिकारी ने कहा कि बाद में इन लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी पहचान को डिलीट कर दिया। इससे शंका और बढ़ता है। जांच में शामिल सूत्रों ने बताया कि महिलाओं से उनके ही घर पर पूछताछ की जा रही थी। उनके खाने की जांच की जा रही है और अधिकारी उनका कचरा भी उठा रहे हैं। रविवार को उन्हें पूछताछ के लिए दूसरे स्थान पर भी ले जाया गया था। आईएसआई के टारगेट पर रहा है महू दरअसल, इंदौर से 25 किलोमीटर दूर महू शुरू से ही आईएसआई के लिए दिलचस्पी का विषय रहा है। 2018 में यहां तैनात एक जवान को एमपी एटीएस ने गिरफ्तार किया था। जवान को आईएसआई ने हनीट्रैप में फंसा लिया था। सैन्य सूचनाओं के बदले में जवान को सेक्स चैट का लालच दिया गया था। पूछताछ में यह बात सामने आई थी कि पृक्षा अग्रवाल नाम की महिला ने जवान से व्हाट्सएप के जरिए दोस्ती की थी। जानकारी के अनुसार आर्मी क्लर्क अविनाश अकेला नहीं था, जिसे पृक्षा ने हनीट्रैप में फंसाया था। उसके वीडियो कुछ अन्य जवानों के सेल फोन में मिले थे। सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र, यूपी और गुजरात के भी कुछ जवानों ने पूछताछ का सामना किया था। पृक्षा अग्रवाल ने 2018 में आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य के रूप में सेना मुख्यालय के टेलीफोन एक्सचेंज में फोन किया था। इस दौरान वह किसी अफसर को ढूंढ रही थी। तभी अविनाश को अपने जाल में फंसा लिया था। आरोप है कि पाकिस्तानी हैंडलर ने एक स्थानीय एजेंट के जरिए उसके खाते में 50 हजार रुपये भी डलवाए थे। अविनाश को एमपी एटीएस और केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने दिल्ली से मिले एक इनपुट के आधार पर संयुक्त रूप से गिरफ्तार किया था। मोहम्मद परवेज जो उस वक्त एनआईए की कस्टडी में था, उसने ही अविनाश के बारे में जानकारी दी थी। 2018 में परवेज ने सेना के एक अधिकारी को मॉर्फड तस्वीर के जरिए ब्लैकमेल किया था। सूत्रों के अनुसार जांच में यह बात सामने आई थी कि वह 18 साल में 17 बार पाकिस्तान गया था। जवान सोमबीर सिंह के हनीट्रैप केस में पिछले महीने राजस्थान पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया था।


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