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31 दिसंबर तक पूरी व्यस्क आबादी का पूर्ण टीकाकरण कर पाएगा भारत? जानें कितना मुश्किल है लक्ष्य

नई दिल्ली नया साल आने से पहले देश की पूरी व्यस्क आबादी को कोरोना वायरस के खिलाफ सुरक्षित कर देना है तो कोविड टीकाकरण की औसत दैनिक रफ्तार पांच गुना के करीब बढ़ानी होगी। कोविड-19 महामारी के खिलाफ देश में 16 जनवरी को की शुरुआत हुई थी जो लगातार जारी है। इन राज्यों में राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा रफ्तार बढ़ाने की दरकार अगर राज्य दर राज्य स्थिति का जायजा लें तो यूपी, बिहार, तमिलनाडु, झारखंड और असम में तो राष्ट्रीय मांग से कहीं ज्यादा रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है। आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर तक देश में टीकाकरण अभियान को मुकाम तक पहुंचाना है तो यूपी में अभी के रोजाना औसत टीकाकरण को नौ गुना, बिहार को आठ गुना जबकि तमिलनाडु, झारखंड और असम को सात गुना तेज करना होगा। साल के बचे 207 दिनों में लक्ष्य हासिल करने की चुनौती हमारे सहयोगी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया (ToI) ने 2021 तक जनसंख्या कार्यालय की अनुमानित राज्यवार व्यस्क आबादी का आकलन किया है। इससे पता चला कि साल के अंत तक किस राज्य को वैक्सीन की कितनी डोज लगानी होगी ताकि उसकी पूरी व्यस्क आबादी कवर हो जाए। फिर टीकाकरण अभियान के 143 दिनों में अब तक हासिल लक्ष्य और दैनिक औसत का विश्लेषण किया गया। देश को यह पता हो कि अब तक क्या हासिल किया गया है तो यह भी पता होना चाहिए कि कितना बाकी बचा है। अगर 8 जून से जोड़ें तो इस साल के खत्म होने में 207 दिन बचे हैं। इसी से हमें राज्यवार व्यस्क आबादी के पूर्ण टीकाकरण के लिए औसत दैनिक रफ्तार के आंकड़े मिल गए। किस राज्य का क्या हाल उत्तर प्रदेश के आंकड़ों पर गौर करें तो वहां 12% से भी कम व्यस्क आबादी को वैक्सीन की पहली डोज मिल पाई है जबकि सिर्फ 2.5% व्यस्क आबादी दूसरी डोज भी ले चुकी है। वहां हर दिन 1.4 लाख डोज की औसत रफ्तार से टीकाकरण अभियान आगे बढ़ रहा है। ऐसे में देखा जाए तो यूपी में दिसंबर तक पूरी व्यस्क आबादी को टीका देने का लक्ष्य हासिल करने के लिए बचे हुए दिनों में 13.2 लाख डोज की औसत दैनिक रफ्तार से टीकाकरण अभियान को बढ़ाना होगा जो अब तक के हासिल दैनिक लक्ष्य के मुकाबले 9 गुना से भी ज्यादा है। इसी तरह, बिहार ने अपनी 12.6% व्यस्क आबादी को टीके की पहली डोज दी है जबकि सिर्फ 2.5% आबादी को दूसरी डोज मिली है। वहां की व्यस्क आबादी के लिहाज से देखें तो शेष समय में बाकी लक्ष्य को हासिल करने के लिए टीकाकरण अभियान की दैनिक रफ्तार 8.4 गुना बढ़ाने की दरकार है। इन राज्यों को राहत दूसरी तरफ, हिमाचल प्रदेश ने अपनी व्यस्क आबादी के 38.1% को पहली डोज जबकि 7.9% को दूसरी डोज दे दिया है। इस लिहाज से उसे दैनिक 18,000 डोज का मौजूदा औसत बढ़ाकर 41,000 (दोगुने से थोड़ा ज्यादा) करना होगा ताकि दिसंबर तक पूरी व्यस्क आबादी को कवर करने का लक्ष्य हासिल किया जा सके। केरल की 31% व्यस्क आबादी को पहली डोज लग चुकी है जबकि 8.1% व्यस्क आबादी का पूर्ण टीकाकरण हो चुका है। इस तरह वहां मौजूदा दैनिक औसत को 2.8 गुना बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी। सबसे ज्यादा व्यस्क आबादी वाले राज्यों में महाराष्ट्र अपवाद देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले पांच राज्य- उत्तर प्रदेश, बिहार, प. बंगाल, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश के सामने मौजूदा दैनिक औसत टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने की बड़ी चुनौती है। महाराष्ट्र इसका अपवाद है जहां यूपी के बाद सबसे ज्यादा व्यस्क आबादी है। उसे 4.5 गुना औसत रफ्तार बढ़ाने की जरूरत होगी। व्यस्क आबादी वाले राज्यों की टॉप 10 लिस्ट में राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश को दैनिक औसत टीकाकरण की रफ्तार तीन से चार गुना तक बढ़ानी होगी। इन सभी राज्यों के लिए यह लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं है।


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