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बिजनेस में घाटे की भरपाई, मॉरिशस में सेट होने का प्लान... ये सब कुछ नकली रेमडेसिविर बेचकर करता पुनीत

इंदौर एमपी में कोरोना जब पीक पर था, तब नकली रेमडेसिविर की कालाबाजारी खूब हुई है। नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन का निर्माण गुजरात में होता था। लोगों की जान से खेलने वाले गुजरात के चारों आरोपियों को इंदौर पुलिस ने रिमांड पर लिया था। इनसे पूछताछ खत्म हो गई है। पुलिस पूछताछ के दौरान यह खुलासा हुआ है कि उनके ऊपर कर्ज ज्यादा हो गया था इसलिए नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन का कारोबार किया है। नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के मामले में विजयनगर पुलिस की पूछताछ लगभग पूरी हो गई है। पिछले दिनों नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के मामले में गुजरात के आरोपियों को विजयनगर पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई थी। इसमें सुनील मिश्रा, कौशल, पुनीत और कुलदीप है। आरोपियों ने पुलिस को बताया है कि इंदौर के अलावे एमपी के दूसरे शहरों में भी नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई की है। आरोपी एमपी में बड़े पैमाने पर नकली इंजेक्शन बेचने की फिराक में थे। इंजेक्शन की 80 हजार बोतलें आरोपी खरीद चुके थे। ये लोग बाजार में पांच हजार नकली इंजेक्शन बेच चुके थे। इनमें से 700 इंजेक्शन इंदौर आए और 500 इंजेक्शन जबलपुर भेजे गए थे। पुलिस ने समय रहते इन आरोपियों को पकड़ लिया, नहीं तो नकली इंजेक्शन की वजह से कितने लोगों की जानें जाती। बिजनेस में हुआ था घाटा एएसपी राजेश रघुवंशी ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों को बिजनेस में लॉस हो गया था और कर्ज चुकाने के लिए नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन का कारोबार करने लगे थे। वहीं, पुलिस ने बताया कि नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने के मामले में कुछ ऐसे आरोपी है जो कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे थे। पढ़ाई कर रहे छात्रों ने बताया कि हम तो पढ़ाई करते थे, हमें नहीं मालूम नहीं था कि यह नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन है। छात्रों ने कहा कि हम चंद रुपयों के लिए इंजेक्शन बेच रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ पूरी हो गई है। हम जल्द ही इन्हें गुजरात पुलिस को सौंप देंगे।


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