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'क्या कोविड सुविधा के लिए अभी भी सरकारी मदद की जरूरत है', पटना हाईकोर्ट का ESIC अस्पताल से सवाल

पटना बिहार में कोरोना वायरस के संक्रमण पर लगाम को लेकर नीतीश कुमार सरकार लगातार जरूर कदम उठा रही है। यही वजह है कि सूबे में लॉकडाउन घोषित किया गया है। जिसका असर भी नजर आ रहा, पॉजिटिव केस दिन ब दिन कम हो रहे हैं। इस बीच पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को पटना के बिहटा स्थित ESIC अस्पताल के अधिकारियों से पूछा कि क्या वह अपने दम पर कोविड सुविधा संचालित कर सकते हैं? कोर्ट ने अस्पताल प्रशासन से स्पष्ट करने को कहा कि क्या उन्हें अभी भी प्रदेश सरकार और सशस्त्र बलों के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के मदद की जरूरत है। कोर्ट ने 9 जून को जवाब दाखिल करने के लिए कहाहाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने अस्पताल को सुनवाई की अगली तारीख यानी नौ जून को इस संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। पीठ ने कोरोना संकट को लेकर शिवानी कौशिक, रोहित कुमार और गौरव कुमार सिंह की ओर से दायर तीन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये बातें कही हैं। ESIC अस्पताल ने कोर्ट में सौंपी स्टेटस रिपोर्टवहीं सुनवाई के दौरान ESIC अस्पताल की ओर से स्टेटस रिपोर्ट भी सबमिट किया गया। इसमें हाईकोर्ट को राज्य सरकार के सहयोग से अस्पताल में चल रहे 217 बेड वाले कोविड डेडिकेटेड सुविधा के बारे में अवगत कराया गया। साथ ही अस्पताल में ऑक्सिजन और दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के अलावा एक निजी फर्म की मदद से बायोमेडिकल कचरे के उचित निपटान को सुनिश्चित करने की भी जानकारी दी गई। हालांकि, हाईकोर्ट यह जानने के लिए उत्सुक था कि क्या अस्पताल में शुरू की गई राज्य, सेना और ईएसआईसी की त्रिस्तरीय प्रणाली की अभी भी आवश्यकता है। कोर्ट का सरकार को निर्देश- रोजाना अपडेट करें कोरोना के आंकड़ेंपीठ ने राज्य सरकार को उस प्रणाली को अपग्रेड करने का भी निर्देश दिया जो शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड और अन्य कारणों से होने वाली मौतों का विवरण देती है। इसके साथ ही आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट को अलग-अलग सरकारी पोर्टलों पर दिखाने के बजाय एक जगह पर रखने के भी निर्देश दिए गए। अदालत ने प्रदेश सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह रोजाना आंकड़ों को अपडेट करें।


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