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जबलपुर में बीजेपी-कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, सम्मान शंकर शाह और रघुनाथ शाह का लेकिन निगाहें 2023 के विधानसभा चुनाव पर


जबलपुर : मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी अचानक महत्वपूर्ण हो गए हैं। यही कारण है कि शनिवार को जबलपुर में बीजेपी और कांग्रेस () के शीर्ष नेता जमा हो रहे हैं। 18 सितंबर को गोंड राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुंवर रघुनाथ शाह का बलिदान दिवस है। उन्हें श्रद्धांजलि देने केंद्रीय आ रहे हैं। कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह () मोर्चा संभालेंगे। अमित शाह के दौरे के लिए जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं, 


लेकिन स्थानीय आदिवासी नेताओं को इससे दूर रखा गया है। स्थानीय आदिवासियों ने नवभारत टाइम्स ऑनलाइन को बताया कि यह आयोजन विशुद्ध राजनीतिक है। इससे आदिवासियों को किसी भले की उम्मीद नहीं है। न ही उन्हें यह लग रहा है कि इससे शंकर शाह और रघुनाथ शाह को वह सम्मान मिल जाएगा, जिसके वो हकदार थे। उन्हें बस इस बात का संतोष है कि राष्ट्रीय स्तर के नेता उनके शहीद राजा को याद कर रहे हैं।


 पिता-पुत्र की इस जोड़ी को आदिवासी अपना जननायक मानते हैं और उन्हें श्रद्धा की नजरों से देखते हैं। कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ही पार्टियां बलिदान दिवस पर शक्ति प्रदर्शन कर खुद को आदिवासियों की सबसे बड़ी हितैषी साबित करने की कोशिश कर रही हैं। 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों की नजरें आदिवासियों के वोट बैंक पर टिकी हैं।

 दो साल बाद विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में खंडवा लोकसभा और विधानसभा की तीन सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में आदिवासियों का वोट कांग्रेस के खाते में गया था। इसके बाद से ही बीजेपी उन्हें अपने पाले में करने की जुगत लगा रही है। बड़वानी में 6 सितंबर को कांग्रेस ने टंट्या मामा भील के जन्मस्थल से आदिवासी अधिकार यात्रा निकाल कर यह संदेश दिया था कि उसे आदिवासियों की फिक्र है।

 बलिदान दिवस पर जनजातीय समाज जोड़ो अभियान की शुरुआत कर बीजेपी इसका जवाब देने की तैयारी में है। आदिवासी भी राजनीतिक पार्टियों के इस खेल को समझते हैं। उन्हें पता है कि ऐसे आयोजनों से आदिवासियों का भला नहीं होने वाला। उन्हें यह दुख जरूर है कि स्थानीय आदिवासियों को इस आयोजन से दूर रखा गया है।

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