Bhopal Arts and Culture News: पवित्र जल के संग्रहण और छिड़काव का पात्र है 'मारा चेम्बु', जानिए क्यों है खास

Bhopal Arts and Culture News: राजधानी में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय की नवीन श्रृंखला सप्ताह का प्रादर्श के अंतर्गत सितंबर माह के अंतिम सप्ताह के प्रादर्श के रूप में 'मारा चेम्बु' नामक पवित्र जलपात्र को प्रदर्शित किया गया है। वर्ष 2014 में पूर्वी गोदावरी, आंध्र प्रदेश के ब्राह्मण समुदाय से संकलित जलपात्र की ऊंचाई 30 सेमी, गोलाई 63 सेमी और ढक्कन का व्यास 12 सेमी है।
इस संबंध में संग्रहालय के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि मारा चेम्बु पीतल से बना एक पात्र है, जिसका उपयोग हिंदू मान्यताओं के अनुसार धार्मिक अनुष्ठानों के निमित्त पवित्र जल भंडारण हेतु किया जाता है। ढक्कन पर एक घुमाया जा सकने वाला हत्था लगा है, जिसे आवश्यकतानुसार पात्र को उठाने और उसे खोलने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसका मुख्य हिस्सा गोलाकार है, जिसमें गर्दन का भाग अंदर की ओर दबा हुआ और मुंह बेलनाकार तथा संकरा है।
ढक्कन पात्र का एक महत्वपूर्ण घटक है जो पवित्र जल का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करता है और शुद्धता बनाए रखता है। सतह पर रखे जाने पर पूरी संरचना को सहारा देने के लिए आधार को गोलाकार फैलाव के साथ बढ़ाया गया है। हिंदू रीति-रिवाजों में पवित्र जल का छिड़काव पूजास्थल, पूजन सामग्रियों, देवताओं को अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे और भक्तों को दिए जाने वाले प्रसादों की शुद्धि के लिए किया जाता है।
हिंदू समुदायों में जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी समारोहों में इस पात्र का बहुत महत्व है और भगवान शिव और अन्य देवताओं के अभिषेक के दौरान पवित्र जल या दुग्ध अर्पण के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। यह भी मान्यता है कि गंगा के पावन जल से भरा बर्तन घर में रखना शुभ होता है और इसे धैर्य, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह शक्ति, सकारात्मकता और आरोग्य लाता है। दर्शक इस खास जल-संग्रहण पात्र का अवलोकन मानव संग्रहालय की अधिकृत वेबसाइट, फेसबुक के अतिरिक्त इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से घर बैठे भी कर सकते हैं।
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