Pothole on Roads in Indore: जानलेवा गड्ढे बन गए इंदौर की पहचान, अफसर बन रहे अनजान

Pothole on Roads in Indore: जानलेवा गड्ढे बन गए इंदौर की पहचान, अफसर बन रहे अनजा
Pothole on Roads in Indore: इंदौर । स्वच्छता में देशभर में पहचान बनाने वाला इंदौर गड्ढों के मामले में बदनाम होने लगा है। जिन रास्तों से शहर में लोग प्रवेश करते हैं, वहां गड्ढों से उनका स्वागत होता है। चाहे खंडवा रोड हो या बायपास। यहां 50 मीटर सड़क भी गड्ढों के बगैर दिखाई नहीं देती, लेकिन अब गड्ढे जानलेवा बन गए हैं। शहर की भीतरी सड़कों के भी यही हाल हैं। शनिवार को एक छात्रा की जान रिंग रोड के एक गड्ढे ने ले ली। निगम की लापरवाही की कीमत शहरवासियों को जख्मी होकर चुकानी पड़ रही है। वोट लेकर जनता को सुविधा देने का वादा करने वाले जनप्रतिनिधियों ने भी चुप्पी साध रखी है। शहर में बड़े-बड़े अभियानों का एलान होता है, लेकिन अफसरों को गड्ढे भरने की फुर्सत नहीं है।
योजना में गड़बड़ी से सड़कों की सेहत बिगड़ी
शहर के पहले स्मार्ट रोड (महू नाका से टोरी कार्नर) के अलावा भी कई सड़कों पर नगर निगम लगातार गड्ढों के घाव दे रहा है। इनमें पांच साल पहले बनी मूसाखेड़ी सड़क, एमआर-4 और धार मार्ग जैसी सड़कें शामिल हैं। कहीं जल आर्पूर्ति के पाइप लाइन के लिए गड्ढे खोदे जा रहे हैं, तो कहीं जल-मल निकासी के लिए खोदाई की जा रही है। कुछ साल पहले बनी इन सड़कों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों की फजीहत हो रही है। आसपास रहने वाले और सड़कों से गुजरने वाले नगर निगम की व्यवस्थाओं को कोसते हैं। अफसर यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं कि पानी और जल-मल निकासी के काम जरूरी हैं, इसलिए सड़कें खोदनी पड़ रही हैं।
मूसाखेड़ी रोड : सर्विस लाइन के लिए नहीं छोड़ी जगह
मूसाखेड़ी मेन रोड को 2016-17 में बनाया गया था। तब निगम के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया कि सड़क के आसपास सर्विस लाइन बिछाने के लिए जगह छोड़नी पड़ेगी। अब मूसाखेड़ी में नई टंकी बनकर तैयार है। उससे जल वितरण शुरू होना है, इसलिए डिस्ट्रीब्यूशन लाइन बिछाने के लिए जगह-जगह से सड़क काटी जा रही है। इससे क्षेत्रीय लोग परेशान हो रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि जब सड़क बनाई जा रही थी, तब अधिकारियों ने इसका ध्यान क्यों नहीं रखा?
एमआर-4 : छह महीनों से अधूरा काम
सरवटे बस स्टैंड से भंडारी पुल के बीच एमआर-4 का काम नगर निगम ने पांच साल पहले शुरू किया था। जल-मल निकासी में जगह-जगह ब्लाकेज और अन्य गड़बड़ियों के कारण सड़क पर दर्जनभर जगह खोदाई कर नई लाइन बिछानी पड़ी। राजकुमार ब्रिज की भुजा के पास अभी भी एक हिस्से का काम अधूरा है और निगम अधिकारी काम पूरा कराने के बजाय आधा हिस्सा बंद कर बैठे हैं।
धार रोड : जल-मल निकासी के लिए खोदी सड़क
धार रोड पर जल-मल निकासी पाइप लाइन के लिए जीएनटी मार्केट के आसपास सड़क की पैनल उखाड़कर काम किया जा रहा है। यह सड़क भी लंबे इंतजार के बाद बनी है। वहां जल-मल निकासी की अतिरिक्त लाइन बिछाई जा रही है। खोदाई से जगह-जगह बाटल नेक बन गए हैं, जिससे बड़े वाहनों को गुजरने में दिक्कत हो रही है। जब काम पूरा होगा, तब टूटी सड़क फिर बनाई जाएगी।
सड़क पर गड्ढे या गड्ढों में सड़क, समझना मुश्किल
मध्य क्षेत्र : पूरे शहर की सड़कों की जिम्मेदारी जिस नगर निगम पर है, उसके मुख्यालय के सामने ही सड़क बदहाल है। निगम मुख्यालय से जिंसी चौराहे तक दर्जनों गड्ढे हैं। समझ नहीं आता कि सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। मुख्यालय से चंद कदम दूर शासकीय संस्कृत महाविद्यालय के पास ऐसी कोई संरचना नहीं है जिसे सड़क कहा जा सके। संघ प्रमुख की यात्रा के चलते किया गया पैचवर्क भी उखड़ने लगा है। वाहन हिचकोले खाते निकलते हैं। एमजी रोड को सुभाष मार्ग से जोड़ने वाले अहिल्यापुरा मेन रोड की हालत बहुत खराब है। इसी सड़क पर सीएसपी कार्यालय भी है। गड्ढों की वजह से आए दिन हादसे होते रहते हैं। इसी तरह जिंसी चौराहे से लक्ष्मीबाई प्रतिमा तक सड़क की हालत इतना खराब है कि आए दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है।
पैचवर्क के नाम पर कच्ची मुरम
पैचवर्क के नाम पर भी फर्जीवाड़ा चल रहा है। कच्ची मुरम डालकर दिखाने के लिए गड्ढे बंद किए जा रहे हैं। हल्की बारिश होते ही यह मुरम पानी के साथ बह जाती है और गड्ढा फिर नजर आने लगता है।
सर्विस रोड पर एक-एक मीटर लंबे गड्ढे
कनाड़िया रोड से बायपास पर खंडवा रोड की तरफ जाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। कनाड़िया अंडरपास को पार करते ही करीब एक किलोमीटर तक बिचौली गांव की सर्विस रोड पर जाना होता है। इस सड़क एक-एक मीटर लंबे गड्ढे हो गए हैं। बायपास से स्टार चौराहे और रेडिसन होटल की तरफ जाने वाले वाले वाहन चालकों के लिए भी यही परेशानी है। लाभगंगा गार्डन के सामने सर्विस रोड और मुख्य सड़क के बीच एक से डेढ़ फुट गहरे गड्ढे हो गए हैं।
निपानिया में ऊंट की सवारी जैसा अहसास
निपानिया क्षेत्र की कई सड़कें गड्ढों से पट गई हैं। यहां से गुजरना वाहन चालकों के लिए ऊंट की सवारी करने जैसा हो गया है। इसके चलते वाहन फिसल रहे हैं। गुलाबबाग, सत्यसाईं कालोनी, स्कीम 114 और 94 को जोड़ने वाली सर्विस रोड पर जलजमाव हो रहा है। बांबे हास्पिटल चौराहे से महालक्ष्मी नगर होते हुए तुलसी नगर जाने वाले रास्ते पर बारिश होते ही जलजमाव हो जाता है। तुलसी नगर पुलिया के आसपास भी गड्ढे हो गए हैं।
एयरपोर्ट के बाहर हवाई यात्रियों का 'स्वागत' करते हैं गड्ढ़े
हवाई यात्रा कर शहर आने वालों का स्वागत गड्ढों से हो रहा है। सुपर कारिडोर की ओर तो सड़क के बीच में ही कई गड्ढे हैं जबकि नगर में प्रवेश करने के लिए जैसे ही यात्री सड़क पार करते हैं गड्ढे से सामना होता है। यहां कभी चूरी भर दी जाती है, तो कभी बेरिकैड लगाकर खानापूर्ति कर दी जाती है। पंचशील नगर से किला मैदान को जोड़ने वाली 60 फीट रोड पर एमपी पब्लिक स्कूल से वीआइपी रोड तक लंबे वक्त से एक तरफ का हिस्सा खुदा हुआ है।
खंडवा रोड : 50 मीटर सड़क भी नहीं बची साबुत
खंडवा रोड की हालत इन दिनों बद से बदतर है। आइटी पार्क से तेजाजी नगर चौराहे के बीच के शहरी हिस्से पर आसपास बनी कालोनियों के रहवासियों के साथ बसों और ट्रकों के यातायात का भी दबाव रहता है। भंवरकुआं चौराहे से बायपास जंक्शन तक के हिस्से में 50 मीटर सड़क भी साबुत नहीं बची है। पैचवर्क पूरी तरह उखड़ चुका है।
चौराहा पार करते ही बाटलनेक पर गड्ढा : नौलखा चौराहे से भंवरकुआं की ओर जाते ही बाटलनेक का साथ गड्ढे से सामना होता है। एक तरफ सिटी बस और वैन सवारी के लिए खड़ी हो जाती है, तो दूसरी तरफ बीआरटीएस की रेलिंग अड़ जाती है। इससे ट्रैफिक अस्तव्यस्त हो जाता है। अब यहां बड़ा और गहरा गड्ढा हो जाने से बची-खुची सड़क भी खत्म हो गई है।
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