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Gwalior Business News: मिलावटी पूजन सामग्री से पटा पड़ा बाजार, नवरात्रि के लिए संभलकर करें खरीदारी

 
Gwalior Business News: यूं तो 12 महीने मिलावट का बाजार गर्म रहता है, पर त्योहारों के आते ही यह चरम पर पहुंच जाता है। फिर चाहे होली-दीपावली हो या नवरात्र, कोई भी त्योहार मिलावटखोरी से अछूता नहीं रहता। नवरात्र पर पूजन सामग्री की मांग के चलते मिलावटखोरों ने इसमें भी मिलावट शुरू कर दी है। ऐसे में पूजन सामग्री खरीदते समय सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि मिलावटी सामग्री से आप गंभीर रूप से बीमार भी हो सकते हैं। श्री कृष्ण गोविंद प्राकृतिक पूजन सामग्री की निर्माता मीनाक्षी नागर ने असली व मिलावटी पूजन सामग्री को पहचानने के कुछ तरीके बताए हैं, जिन्हें आपके साथ साझा किया जा रहा है।

ऐसे करें असली-नकली की पहचान

कपूर: असली कपूर जलने पर उड़ जाता है। कपूर के जलने के बाद अगर राख नजर आए तो समझ जाएं कि ये नकली है।



सिंदूर: मिलावट खोर लेड, खड़िया, सिंथेटिक रंग और कई केमिकल का उपयोग कर नकली सिंदूर बना रहे हैं। असली सिंदूर को हथेली पर रख पानी की कुछ बूंदें डालें, अगर ये तुरंत घुल जाए तो असली है। सिंदूर को हथेली पर रखकर उड़ाए यदि व चिपका रह जाए तो नकली है।


चंदन: बाजार में लाल-पीले व सफेद रंग के चंदनों की भरमार है। इनमें खड़िया, मुल्तानी मिट्टी, सिंथेटिक रंग और खुशबू के लिए एसेंस के अलावा कुछ भी नहीं है। चंदन की हमेशा लकड़ी खरीदें, जिसे पत्थर पर पानी के साथ घिस कर उपयोग करें।



धूप बत्ती: असली धूप बत्ती, कपूर, कचरी, तालीस पत्र, तेज पात, तामरू, गोरख मुंडी, पीपल, देवदार, चीड़ के बुरादे, हवन सामग्री एवं शुद्ध घी से बनती है। वहीं नकली धूप बत्ती टायर, चप्पल का चूरा और गंदा बिरोजा (तारकोल) क्रूड एवं केमिकल मिला कर बनाई जाती है। असली धूप बत्ती का धुआं सफेद और नकली का काला होता है।


हवन सामग्री: सामान्यत हवन सामग्री में जौ, तिल, शक्कर, घी, गुग्गुल, सूखे मेवे, नागकेसर तेज पत्र, तमाल पत्र, हल्दी, कचूर, कपूर, दारुहल्दी, केसर, इंद्रजौ, कमलगट्टे, भोज पत्र, जटामासी, चंदन लौंग इलायची, गिलोय, पित्तपापड़ा, अपामार्ग इत्यादि होता है। वहीं नकली हवन सामग्री में सामान्य लकड़ी का बुरादा, नाममात्र की तिल के साथ कूड़ा करकट केमिकल एसेंस मिला होता है। इससे बचने आप पैकेट बंद सामग्री लेने के स्थान पर घर में मौजूद चीजों से ही हवन सामग्री तैयार करें।


कलावा: नकली कलावा सिंथेटिक रंग और धागे से बना होता है। इससे एलर्जी की समस्या हो सकती है। कलावा खरीदने से पहले आप कलावे को तोड़कर देखें, अगर कलावा जल्दी टूट जाए तो असली है।


देशी घी: देशी घी में रिफाइंड व वनस्पति घी मिलाया जा रहा है। असली घी जांचने के लिए कांच के ग्लास में थोड़ा सा घी डालकर उसमें हाईड्रोक्लोरिक एसिड की कुछ बूंद व चुटकी भर चीनी मिलाएं और गरम करें, अगर यह लाल हो जाए तो घी नकली है।


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