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Indore Jitendra Vyas Column: राजनीति के सुर गड़बड़ा रहा राग जयस







Indore Jitendra Vyas Column जितेंद्र व्यास,  आलीराजपुर जिले की जोबट विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की तारीख भले ही अब घोषित हुई है, लेकिन राजनीतिक दल चुनाव की तैयारियों में कई दिनों से जुटे थे। भाजपा-कांग्रेस को बारी-बारी से विधायक देने वाली इस विधानसभा सीट पर इस बार राजनेताओं और उनकी राजनीति के 'सुर' तीसरी ताकत की आहट से गड़बड़ाए हुए हैं। 


99 प्रतिशत से अधिक आदिवासी वोटों वाली इस विधानसभा सीट पर इस बार जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) की सक्रियता अधिक है। जोबट की राजनीति का यही राग जयस यहां के दावेदारों की चिंता बढ़ा रहा है। फिलहाल टिकट की दौड़ में जुटे दावेदार तीसरी शक्ति के संभावित उम्मीदवारों की टोह भी ले रहे हैं, और उनकी गतिविधियों पर नजरें भी जमाए हुए हैं। यह चिंता इसलिए भी है कि बीते चुनाव में भी इसी तरह तीसरे उम्मीदवार की वजह से मुकाबला कांटे का हो गया था।


अपने पदाधिकारी पर जिलाबदर की कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस नेता इस बार रैली के दौरान चौंकन्ने नजर आए। रैली के बाद कमिश्नर कार्यालय पर जब ज्ञापन सौंपा जा रहा था तब विशेष सतर्कता बरती जा रही थी। वरिष्ठ नेताओं की एक टीम 'उत्साही कार्यकर्ताओं' पर पूरे समय नजर जमाए रही। दरअसल ये सावधानी पिछले प्रदर्शन के 'बुरे अनुभवों' के बाद रखी जा रही थी।


 तब प्रदर्शन में शामिल एक पदाधिकारी ने वहां मौजूद एएसपी स्तर के एक अधिकारी से अभद्रता कर डाली थी। इसके बाद पुलिस ने पहले अपनी लाठियों से गरमाया और फिर वाटर कैनन से नहलाया था। इस प्रदर्शन में किसी तरह भीड़ तो जुटा ली गई लेकिन पिछली बार की तरह फिर पुलिस 'जलाभिषेक' शुरू न कर दे, इस बात का ख्याल सबसे ज्यादा रखा जा रहा था। रैली के पहले ही पुलिस अधिकारियों को भी आश्वस्त कर दिया था कि सब शांति से ही होगा।


तुम डाल-डाल तो हम पात-पात

गरीबों के लिए भेजा जाने वाला राशन गरीबों के बजाय साहूकारों के गोदामों तक पहुंचने से रोकने के लिए किए गए तमाम सरकारी इंतजाम और दावे बार-बार दम तोड़ते नजर आते हैं। बायोमेट्रिक फिंगर प्रिंट सिस्टम हो या फिर राशन परिवहन के वाहनों पर जीपीएस ट्रैकर लगाकर चोरी रोकने के इंतजाम, राशन माफिया के पास हर सिस्टम की काट है। बीते साल शहर में हुए राशन घोटाले के बाद राशन माफिया पर सख्त कार्रवाई कर यह संदेश दिया गया था कि यदि अब गड़बड़ी की तो बख्शेंगे नहीं,


 लेकिन इस बार जैसे ही जांच शुरू हुई फिर नए-नए घोटालों की परतें खुलने लगीं। गरीबों का अनाज बदस्तूर राशन माफिया के गोदामों में पहुंच रहा है। मामले की जांच में जुटे अधिकारी हैरान हैं कि अब आखिर कौन से तरीके से इन पर नजर रखी जाए ताकि इस कालाबाजारी पर अंकुश लगाया जा सके।



जो कभी थे सहारा, अब ढूंढ रहे किनारा

राजनीति में वक्त कब करवट ले लेता है, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल होता है। संगठनात्मक दृष्टि से मजबूत मानी जाने वाली भाजपा ने बीते दिनों संभागीय संगठन मंत्री व्यवस्था समाप्त कर दी। पार्टी स्तर पर गहन मंथन कर इस निर्णय तक पहुंचने के पीछे की कहानी भी कम रोचक नहीं है। दरअसल संभागों में विधायकों-सांसदों के अलावा संगठन मंत्री का भी खेमा आकार लेने लगा था। पसंद-नापसंद और अपनी टीम तैयार करने के आरोप दो-तीन वर्षों से प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन तक पहुंचने लगे थे। 


पार्टी ने गुपचुप तरीके से व्यवस्था की समीक्षा की तो सारी हकीकत सामने आ गई। इसके बाद संभागीय मुख्यालयों पर मौजूद सभी क्षत्रपों को अपने-अपने दायित्वों से कार्यमुक्त कर दिया गया। क्षत्रपों के सहारे अपनी राजनीतिक कश्ती पार लगाने की जुगत लगा रहे पदाधिकारी ये कहते सुने जा रहे हैं कि हम जिनके भरोसे थे वे खुद ही किनारा तलाश रहे हैं।


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