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खजूर के पत्ते का सेहरा, सीधे पल्लू में दुल्हन और पालकी पर विदाई, इनोवेशन के लिए चर्चित एसडीओपी की बुंदेली शादी की देखिए तस्वीरें

पृथ्वीपुर के एसडीओपी संतोष पटेल की शादी बुंदेलखंड की परंपराओं के अनुसार हुई। इसमें न कोई तड़क-भड़क थी, न ही ग्लैमर। सारे तौर-तरीके देसी थे।

आजकल कटरीना कैफ और विकी कौशल की शादी की चर्चाएं जोर-शोर से चल रही हैं। पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं। एक्टर-एक्ट्रेस ही नहीं, सामान्य लोगों की शादियों में भी ग्लैमर और तड़क-भड़क देखने को मिलता है, लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसी शादियां भी होती हैं जो इनसे एकदम अलग होती हैं। ऐसी ही एक शादी पिछले दिनों मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में देखने को मिली।


खजूर के पत्ते का सेहरा, सीधे पल्लू में दुल्हन और पालकी पर विदाई, इनोवेशन के लिए चर्चित एसडीओपी की बुंदेली शादी की देखिए तस्वीरें

पृथ्वीपुर के एसडीओपी संतोष पटेल की शादी बुंदेलखंड की परंपराओं के अनुसार हुई। इसमें न कोई तड़क-भड़क थी, न ही ग्लैमर। सारे तौर-तरीके देसी थे।



29 नवंबर को हुई शादी
29 नवंबर को हुई शादी

बीते 29 नवंबर को पृथ्वीपुर के एसडीओपी की शादी हुई। शादी चंदला की गहरावन गांव में रोशनी के साथ हुई। इसमें आधुनिकता की बजाय परंपराओं के अनोखे नजारे देखने को मिले। दूल्हा-दुल्हन के परिधान के साथ सारे तौर-तरीके भी विशुद्ध बुंदेलखंड के थे।



बुंदेली परंपराओं से हुई शादी
बुंदेली परंपराओं से हुई शादी

एसडीओपी संतोष पटेल की शादी में ना कोई बैंड-बाजा था, न हाई प्रोफाइल बारातियों की फौज। यह शादी विशुद्ध बुंदेली परंपराओं के अनुरूप हुई। संतोष पटेल पन्ना जिले में अजयगढ़ के देव गांव के रहने वाले हैं। उनकी शादी पश्चिमी तौर-तरीकों की जगह सैकड़ों साल पुरानी बुंदेली परंपराओं के अनुरूप हुई।



दूल्हे का देसी परिधान
दूल्हे का देसी परिधान

शादी में दूल्हे संतोष पटेल ने आलीशान सेहरा नही बल्कि खजूर के पत्तों का मुकुट पहना था। उन्होंने शादी के लिए परिधान भी विशुद्ध भारतीय चुना था।



दुल्हन का भी भारतीय अंदाज
दुल्हन का भी भारतीय अंदाज

एसडीओपी की दुल्हन रोशनी भी ठेठ भारतीय लिबास में थी। शादी के जोड़े पर सीधे पल्ले की चुनरी हर किसी का मन मोह रहा था। शादी में बजने वाले गीत भी परंपरागत बुंदेली गाने थे।



दूल्हा-दुल्हन ने की साइकिल की सवारी
दूल्हा-दुल्हन ने की साइकिल की सवारी

पुरातन परंपरा के साथ सादगी भरे विवाह उत्सव में जब दूल्हा दुल्हन को हाथ लगवाने के लिए सपरिवार ले गया तो इसके लिए कोई चमचमाती कार नहीं थी। प्रदूषण से मुक्त वाहन साइकिल पर एसडीओपी साहब की दुल्हन उनके साथ सवार थी। विदाई के लिए भी पालकी का इस्तेमाल किया गया।



चर्चा में परंपरागत शादी
चर्चा में परंपरागत शादी

सादगी और परंपराओं पर आधारित एसडीओपी की शादी इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। ड्यूटी के दौरान अपने इनोवेटिव तरीकों के लिए चर्चा में रहने वाले एसडीओपी संतोष पटेल का मानना है कि पद प्रतिष्ठा और आधुनिकता से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण सामाजिक संस्कृति और परंपराएं होती हैं। इन्हें सहेजकर रखना जरूरी है नहीं तो समाज अपनी पहचान खोने लगता है। इसीलिए उन्होंने अपनी शादी के लिए परंपरागत तरीके को चुना।





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