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आपको कोरोना वायरस का मरीज बना सकती हैं ये 6 गलतियां

कोरोना वायरस का प्रकोप एक बार फिर बढ़ गया है। कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रोन के आने के बाद नए मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दूसरी लहर के दौरान लाखों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा और अब एक बार बड़ी चुनौती सामने है। कोरोना का कोई स्थायी इलाज नहीं है वैक्सीन लगवा चुके लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन सहित दुनियाभर की तमाम मेडिकल संस्थाएं और एक्सपर्ट वायरस से बचाव के लिए कोविड से बचाव के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का सुझाव दे रहे हैं।ओमीक्रोन की वजह से कोरोना की तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है। यह संस्करण बेहद संक्रामक और तेजी से फैलने वाला है। हाल ही में डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ट्रेडोस एडनॉम घेबियस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि नए वैरिएंट को माइल्ड (हल्का) के तौर पर नहीं मान लेना चाहिए. अभी तक ओमीक्रोन के लक्षण हल्के पाए गए है लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसके लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं। अब तक के साक्ष्य बताते हैं कि यह वेरिएंट डेल्टा वेरिएंट और ऑरीजनल कोविड-19 स्ट्रेन दोनों की तुलना में फेफड़ों को कम नुकसान पहुंचाता है।थकान, शरीर में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, रात में पसीना आना, सूखी खांसी, बुखार, बहती नाक, छींक आना, मतली ओमिक्रॉन संक्रमण से जुड़े कुछ मुख्य लक्षण हैं। कुछ लोग इसके लक्षणों को हल्का समझकर इसे नजरअंदाज कर रहे हैं, जोकि इसके तेजी से फैलने की एक बड़ी वजह है। कोरोना काल में अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो हम आपको कुछ ऐसी गलतफहमियां और गलतियां बता रहे हैं जिनसे आपको बचना चाहिए।

Omicron se kaise bache: कोरोना वायरस का प्रकोप एक बार फिर तेजी से बढ़ रहा है और तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में थोड़ी सी भी लापरवाही आपको खतरे में डाल सकती है


Covid-19 Omicron virus risk factor: आपको कोरोना वायरस का मरीज बना सकती हैं ये 6 गलतियां, समझें और बचाव करें

कोरोना वायरस का प्रकोप एक बार फिर बढ़ गया है। कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रोन के आने के बाद नए मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दूसरी लहर के दौरान लाखों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा और अब एक बार बड़ी चुनौती सामने है। कोरोना का कोई स्थायी इलाज नहीं है वैक्सीन लगवा चुके लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन सहित दुनियाभर की तमाम मेडिकल संस्थाएं और एक्सपर्ट वायरस से बचाव के लिए कोविड से बचाव के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का सुझाव दे रहे हैं।

ओमीक्रोन की वजह से कोरोना की तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है। यह संस्करण बेहद संक्रामक और तेजी से फैलने वाला है। हाल ही में

डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ट्रेडोस एडनॉम घेबियस (Tedros Adhanom Ghebreyesus)

ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि नए वैरिएंट को माइल्ड (हल्का) के तौर पर नहीं मान लेना चाहिए.

अभी तक

ओमीक्रोन के लक्षण

हल्के पाए गए है लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसके लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं। अब तक के साक्ष्य बताते हैं कि यह वेरिएंट डेल्टा वेरिएंट और ऑरीजनल कोविड-19 स्ट्रेन दोनों की तुलना में फेफड़ों को कम नुकसान पहुंचाता है।थकान, शरीर में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, रात में पसीना आना, सूखी खांसी, बुखार, बहती नाक, छींक आना, मतली ओमिक्रॉन संक्रमण से जुड़े कुछ मुख्य लक्षण हैं।

कुछ लोग इसके लक्षणों को हल्का समझकर इसे नजरअंदाज कर रहे हैं, जोकि इसके तेजी से फैलने की एक बड़ी वजह है। कोरोना काल में अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो हम आपको कुछ ऐसी गलतफहमियां और गलतियां बता रहे हैं जिनसे आपको बचना चाहिए।



जो एक बार संक्रमित हो चुके, वे अब सुरक्षित हैं
जो एक बार संक्रमित हो चुके, वे अब सुरक्षित हैं

एक बार कोरोना से संक्रमित होने पर बेशक एक लेवल पर इम्यूनिटी विकसित हो सकती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको दोबारा संक्रमण नहीं हो सकता। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 'ओमीक्रोन के मामले में पुन: संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसका मतलब यह है कि जिन लोगों को पहले कोरोना था, उन्हें ओमीक्रोन अधिक आसानी से दोबारा संक्रमित कर सकता है। वैज्ञानिक प्रमाणों ने संकेत दिया है कि नैचुरल इम्यूनिटी 6 महीने से एक वर्ष तक बनी रह सकती है। ऐसा कहा जाता है कि यह संक्रमण के बाद लगभग 90 दिनों तक अपने चरम पर होता है और उसके बाद कम होना शुरू हो जाता है।



ओमीक्रोन के लक्षण हल्के हैं, कुछ नहीं होगा
ओमीक्रोन के लक्षण हल्के हैं, कुछ नहीं होगा

अभी तक ओमीक्रोन संक्रमण के ज्यादातर मामले हल्के बताए जा रहे हैं। संक्रमित लोगों में सर्दी, बुखार और खांसी जैसे आम लक्षण देखने को मिले हैं, जिन्हें आसानी से मैनेज और इलाज किया जा सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञ ओमीक्रोन को हल्के में नहीं लेने की चेतावनी भी दे रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में बताया कि कहा कि ओमीक्रोन 'बहुत अधिक' जोखिम पैदा कर सकता है और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है।

डब्ल्यूएचओ के महामारी विज्ञानी डॉ मारिया वैन करखोव के अनुसार, डेल्टा की तुलना में ओमीक्रोन के कुछ मामलों में अस्पताल में भर्ती होने का कम जोखिम देखा गया है, फिर भी इससे बहुत से लोग संक्रमित हैं, अस्पताल में बीमार हैं और मर रहे हैं।



दोनों टीके लगवाने के बाद महसूस होंगे सिर्फ हल्के लक्षण
दोनों टीके लगवाने के बाद महसूस होंगे सिर्फ हल्के लक्षण

कोरोना वायरस के दोनों टीके लगवाना बहुत जरूरी और सराहनीय कदम है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप दोबारा कोरोना की चपेट में नहीं आ सकते। अगर आप दोनों टीके लगवा चुके हैं और यह सोच रहे हैं कि आपकी इम्यूनिटी स्ट्रोंग हो गई है और केवल हल्के लक्षण विकसित होंगे, तो आप गलत सोच रहे हैं।

बेशक कोरोना के टीके अत्यधिक प्रभावकारी साबित हुए हैं लेकिन बावजूद इसके लोगों को संक्रमित होते देखा गया है। इसका मतलब यह है कि पूरी तरह से टीका लगाए गए लोगों में अभी भी वायरस से संक्रमित होने और लक्षण विकसित होने की संभावना है।



सामान्य सर्दी के लक्षणों को नजरअंदाज करना
सामान्य सर्दी के लक्षणों को नजरअंदाज करना

सिरदर्द, गले में खराश, खांसी या हल्का बुखार होना ये सभी सामान्य सर्दी या फ्लू के संक्रमण की तरह लग सकते हैं। लेकिन विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि इस तरह के लक्षण होने पर कोरोना वायरस की जांच कराई जानी चाहिए।

ऐसे समय में, जब कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं, लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों को हल्के में न लें और तुरंत आरटी पीसीआर या रैपिड एंटीजन टेस्ट करवाएं। अगर आपका रिजल्ट पॉजिटिव आता है, तो कम से कम 10 दिनों के लिए खुद को अलग करना सबसे अच्छा है।



सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करना
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करना

बहुत से लोग सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कोरोना वायरस के नियमों का बिल्कुल भी पालन नहीं कर रहे हैं और यही वजह है कि नए मामलों की संख्या एक लाख पार कर गई है। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि अगर ऐसा ही रहा तो तीसरी लहर कभी भी आ सकती है।

कोरोना को आए दो साल से ज्यादा हो गए हैं और अब इसके नए-नए वैरिएंट दस्तक दे रहे हैं। हालांकि इन सभी से बचाव के लिए कोरोना के लिए जारी गाइडलाइंस का पालन करते रहना जरूरी है। इस खतरनाक समय में लापरवाही से बचें और बचाव के सभी उपाय करें।



मास्क नहीं पहनना
मास्क नहीं पहनना

मास्क कोरोना महामारी से निपटने का सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है इसलिए इस मामले में बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें। ध्यान रहे वायरस संपर्क से फैलता है या जब हम सांस लेते हैं, बात करते हैं, खांसते हैं या छींकते हैं। चेहरे को ढंकने से न केवल बीमारी के संकुचन को रोका जा सकता है, बल्कि प्रसार को भी रोका जा सकता है।

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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।





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