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बूस्टर डोज क्यों जरूरी, कैसे पता चलेगा कि किसी को COVID-19 बूस्टर शॉट की आवश्यकता है?

भारत में कोरोना वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। कोरोना के घातक वैरिएंट ओमीक्रोन के आने के बाद नए मामलों की संख्या ने रफ्तार पकड़ ली है। रविवार को कोरोना संक्रमण के 1,79,339 नए मामले सामने आए और इसके साथ ही देश में सक्रिय रोगियों की कुल संख्या सात लाख से अधिक हो गई। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मद्देनजर देश में आज यानी 10 जनवरी से बूस्टर खुराक (booster dose) की प्रक्रिया शुरू होगी। इसे कोरोना की तीसरी खुराक भी कहा जाता है, जो कई देशों में दी जा रही है। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए यह डोज जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिसमस के दिन इस बारे में घोषणा की थी। भारत में इसे प्रिकॉशन डोज (Precaution Dose) के नाम से जाना जाएगा। यह डोज कोरोना वॉरियर्स (स्वास्थ्यकर्मी और अग्रिम मोर्चे के कर्मी) और 60 साल से अधिक उम्र के अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को दी जाएगी।सवाल यह है कि बूस्टर डोज किन लोगों के लिए जरूरी है? सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, कोविड-19 की बूस्टर डोज कोरोना वॉरियर्स जिनमें स्वास्थ्य कर्मचारी, अग्रिम मोर्चे की कार्यकर्ता और वरिष्ठ नागरिकों को दी जाएगी। वरिष्ठ नागरिकों में 60 साल से अधिक उम्र के वो बुजुर्ग शामिल हैं, जिन्हें कोई पुरानी गंभीर बीमारे है या जिन्हें डॉक्टर ने तीसरी खुराक की सलाह दी है। हालांकि अभी सभी बुजुर्गों को अनिवार्य रूप से डोज लगवाने को नहीं कहा गया है।

Booster dose kyu jaroori: कोरोना वायरस का कोई स्थायी इलाज नहीं है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन को असरदार माना जा रहा है। अब तक यह देखा गया है कि कोविड-19 के टीके गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु के जोखिम को कम करने में प्रभावी रहे हैं।


Booster dose in India: बूस्टर डोज क्यों जरूरी, कैसे पता चलेगा कि किसी को COVID-19 बूस्टर शॉट की आवश्यकता है?

भारत में कोरोना वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। कोरोना के घातक वैरिएंट ओमीक्रोन के आने के बाद नए मामलों की संख्या ने रफ्तार पकड़ ली है। रविवार को कोरोना संक्रमण के 1,79,339 नए मामले सामने आए और इसके साथ ही देश में सक्रिय रोगियों की कुल संख्या सात लाख से अधिक हो गई। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मद्देनजर देश में आज यानी 10 जनवरी से

बूस्टर खुराक (booster dose)

की प्रक्रिया शुरू होगी। इसे कोरोना की तीसरी खुराक भी कहा जाता है, जो कई देशों में दी जा रही है।

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए यह डोज जरूरी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

ने क्रिसमस के दिन इस बारे में घोषणा की थी। भारत में इसे

प्रिकॉशन डोज (Precaution Dose)

के नाम से जाना जाएगा। यह डोज कोरोना वॉरियर्स (स्वास्थ्यकर्मी और अग्रिम मोर्चे के कर्मी) और 60 साल से अधिक उम्र के अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को दी जाएगी।

सवाल यह है कि बूस्टर डोज किन लोगों के लिए जरूरी है? सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, कोविड-19 की बूस्टर डोज कोरोना वॉरियर्स जिनमें स्वास्थ्य कर्मचारी, अग्रिम मोर्चे की कार्यकर्ता और वरिष्ठ नागरिकों को दी जाएगी। वरिष्ठ नागरिकों में 60 साल से अधिक उम्र के वो बुजुर्ग शामिल हैं, जिन्हें कोई पुरानी गंभीर बीमारे है या जिन्हें डॉक्टर ने तीसरी खुराक की सलाह दी है। हालांकि अभी सभी बुजुर्गों को अनिवार्य रूप से डोज लगवाने को नहीं कहा गया है।



बूस्टर डोज और दूसरी खुराक के बीच कितने दिनों का अंतर होना चाहिए
बूस्टर डोज और दूसरी खुराक के बीच कितने दिनों का अंतर होना चाहिए

यह जरूरी है कि जो भी बूस्टर डोज लगवाने से पहले आपको कोरोना वायरस के दोनों टीके लगवाने जरूरी हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोरोना की दूसरी वैक्सीन लगने के 9 महीनों (39 हफ्तों) के बाद ही बूस्टर डोज यानी

प्रिकॉशनरी डोज

लगेगी।



बूस्टर डोज लगवाने के लिए क्या करना होगा
बूस्टर डोज लगवाने के लिए क्या करना होगा

जाहिर है अगर आपने कोरोना की दोनों खुराक ले रखी हैं तो आपको रजिस्ट्रेशन पहले ही हो रखा होगा। जो लोग इसके लिए पात्र हैं, उन्हें कोविन की तरफ से मैसेज आएगा। इसके बाद आपको कोविन की वेबसाइट

www.cowin.gov.in

पर जाकर वैक्सीन सेंटर का चुनाव कर स्लॉट बुक करना होगा। यहां आप अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर भरना है। एक ओटीपी आएगा। उसे वहां भरने पर यह दिख जाएगा कि अभी आपको 9 महीने हुए हैं या नहीं।



बूस्टर डोज क्यों जरूरी है
बूस्टर डोज क्यों जरूरी है

कोरोना वायरस का कोई स्थायी इलाज नहीं है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन को असरदार माना जा रहा है। अब तक यह देखा गया है कि कोविड-19 के टीके गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु के जोखिम को कम करने में प्रभावी रहे हैं। मेडिकल एजेंसी सीडीसी के अनुसार, एक समय बाद इन टीकों की सुरक्षा कम हो सकती है। अध्ययनों से पता चला है कि बूस्टर शॉट न केवल प्रतिरक्षा को बढ़ाता है बल्कि ओमीक्रोन जैसे वेरिएंट के खिलाफ भी आपकी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को व्यापक और मजबूत करने में मदद करता है।



दोनों खुराक लेने के बाद भी कम हो रहा एंटीबॉडी लेवल
दोनों खुराक लेने के बाद भी कम हो रहा एंटीबॉडी लेवल

दरअसल बूस्टर डोज टीके की एक अतिरिक्त खुराक है, जो किसी ऐसे व्यक्ति में सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा को लम्बा करने में मदद कर सकता है जिसने पहली बार में पूरी तरह से प्रतिक्रिया दी थी। बूस्टर डोज की सिफारिश इसलिए की जा रही है क्योंकि यह देखा गया है कि दोनों वैक्सीन लेने के बाद भी लोगों में समय के साथ उनका असर कम हो रहा था यानी उनमें, जो प्रतिरक्षा विकसित हुई थी, वो समय के साथ कम हो जाती है। दूसरा, कोरोना के नए घातक वैरिएंट ओमीक्रोन को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।



कैसे पता चलेगा कि किसी को वास्तव में बूस्टर की आवश्यकता है
कैसे पता चलेगा कि किसी को वास्तव में बूस्टर की आवश्यकता है

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर आप बूस्टर डोज के लिए पात्र हैं, लेकिन आश्वस्त नहीं हैं कि आपको एक और खुराक की आवश्यकता है, तो अपने डॉक्टर से परामर्श करें। वह आपके व्यक्तिगत लाभों और अतिरिक्त खुराक प्राप्त करने के जोखिमों के आधार पर फैसला लेने में आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए आपका डॉक्टर आपके एंटीबॉडी लेवल की जांच कर सकता है, जिसे

एंटीबॉडी टाइटर टेस्ट

(antibody titers test) भी कहा जाता है। प्रतिरक्षा के कई घटक हैं जिसमें एंटीबॉडी एक महत्वपूर्ण है - खासकर संक्रमण के शुरुआती चरणों में। यदि आपके टाइटर्स बहुत कम हैं, तो बूस्टर शॉट की सिफारिश की जा सकती है।





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