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शिवजी को पसंद है बेलपत्र, इस आयुर्वेदिक पेड़ के पत्ते चबाने से दूर होंगी Diabetes जैसी 5 घातक बीमारियां

महाशिवरात्रि (Mahashivratri) हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व भगवान शिव की आराधना करके मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 1 मार्च को मनाया जाएगा। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि के विशेष अवसर पर भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। माता पार्वती की तरह मनचाहा वर पाने के लिए लड़कियां व्रत रखती हैं और सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पूजा करती हैं। इस दिन शिवभक्त भगवान को बेल के पत्ते (Bael leaves) चढ़ाते हैं। ऐसा माना जाता है बेलपत्र (Bel patra) भगवान शिव का सबसे प्रिय पत्ता है। बेल के पत्तों से भगवान की पूजा करने से उनके भक्तों को अपार आशीर्वाद मिलता है। बेलपत्र एक त्रिकोणीय पत्ता है, जो हिंदू धर्म में तीन मुख्य देवताओं भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। बेलपत्र को एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी माना जाता है और इससे कई गंभीर बीमारियों से निपटने में मदद मिल सकती है।(फोटो साभार: TOI)

bel patra leaves benefits


Mahashivratri 2022: शिवजी को पसंद है बेलपत्र, इस आयुर्वेदिक पेड़ के पत्ते चबाने से दूर होंगी Diabetes जैसी 5 घातक बीमारियां

महाशिवरात्रि (Mahashivratri)

हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व भगवान शिव की आराधना करके मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 1 मार्च को मनाया जाएगा। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।

महाशिवरात्रि के विशेष अवसर पर भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। माता पार्वती की तरह मनचाहा वर पाने के लिए लड़कियां व्रत रखती हैं और सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पूजा करती हैं। इस दिन शिवभक्त भगवान को

बेल के पत्ते

(Bael leaves) चढ़ाते हैं।

ऐसा माना जाता है बेलपत्र (Bel patra) भगवान शिव का सबसे प्रिय पत्ता है। बेल के पत्तों से भगवान की पूजा करने से उनके भक्तों को अपार आशीर्वाद मिलता है। बेलपत्र एक त्रिकोणीय पत्ता है, जो हिंदू धर्म में तीन मुख्य देवताओं भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। बेलपत्र को एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी माना जाता है और इससे कई गंभीर बीमारियों से निपटने में मदद मिल सकती है।

(फोटो साभार: TOI)



बेल के पत्ते के फायदे
बेल के पत्ते के फायदे

बेल एक औषधीय पौधा है और इसके फल, जड़, पत्ती और शाखा का उपयोग दवाएं बनाने के लिए किया जाता है। बेल का उपयोग कब्ज, दस्त,

डायबिटीज

और अन्य रोगों के लिए के लिए किया जाता है। बेल के पत्तों में टैनिन, फ्लेवोनोइड्स और कौमारिन नामक रसायन होते हैं, जो कई रोगों के उपचार में सहायक हैं। ये रसायन सूजन को कम करने, अस्थमा, दस्त और हाई ब्लड शुगर जैसे विकारों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं।



डायबिटीज कंट्रोल करने में सहायक
डायबिटीज कंट्रोल करने में सहायक

बेल के पत्ते शरीर में ब्लड शुअगर कंट्रोल करने में सहायक हैं। इसका कारण यह है कि इसमें भारी मात्रा में लैक्सटिव गुण पाए जाते हैं, जो पर्याप्त इंसुलिन बनाने में मदद करते हैं और ब्लड शुगर को कंट्रोल करते हैं।



श्वसन संबंधी समस्याओं के लिए
श्वसन संबंधी समस्याओं के लिए

बहुत कम लोगों को पता है कि बेल के पत्तों से एक प्रकार का तेल निकाला जा सकता है, जिसे एसेंशियल ऑयल कहा जाता है। यह तेल वास्तव में अस्थमा और सर्दी सहित सांस की समस्याओं को ठीक करने में मददगार हो सकता है।



कब्ज का रामबाण इलाज
कब्ज का रामबाण इलाज

बेल के पत्तों को को कम नमक और काली मिर्च के साथ चबाने से

कब्ज को तोड़ने

में मदद मिल सकती है। यह आंत से विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए जाना जाता है।



दस्त और हैजा
दस्त और हैजा

बेल में टैनिन पाया जाता है, जिस वजह से यह दस्त और हैजा जैसे रोगों को ठीक करने में उपयोगी है। इसके सूखे कच्चे चूर्ण का भी पुराने दस्त के इलाज में उपयोग किया जाता है। इसके लिए आप कच्चे पत्ते भी चबा सकते हैं।



एंटी इंफ्लेमेटरी गुण
एंटी इंफ्लेमेटरी गुण

बेल में एंटी फंगल और एंटी वायरल गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण इसका उपयोग शरीर में कई तरह के संक्रमणों के इलाज में किया जाता है। बेल के पत्तों में एंटीमाइक्रोबियल गुण भी पाए जाते हैं, जो कई संक्रमणों को ठीक करने में मदद कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।





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